उछल कूद

बस कंडक्टर मां के बेटे अथर्व ने भारत को जिताया अंडर-19 क्रिकेट एशिया कप

भारत ने सातवीं बार अंडर-19 क्रिकेट एशिया कप जीत लिया है। एशिया कप में शनिवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को 5 रनों पराजित किया। भारत की इस जीत में अहम भूमिका निभाने वाले एक ऐसे युवा गेंदबाज थे, जिसका अब तक का जीवन बड़े संघर्षों में बीता है। इस भारतीय युवा लेग ब्रेक स्पिनर बॉलर का नाम है अथर्व अंकोलेकर। मैच के हीरो रहे अथर्व ने 5 विकेट लेकर बांग्लादेश के मैच जीतने की सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया।

9 साल पहले हो गया था अथर्व के पिता का निधन

मुंबई के अंधेरी इलाके में रहने वाले अथर्व अंकोलेकर का अंडर-19 टीम में चयन होने के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और लंबा संघर्ष है। 18 वर्षीय अथर्व जब 9 साल के थे, साल 2010 में उनके पिता का निधन हो गया था। उनके पिता मुंबई पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस (BEST) में बस कंडक्टर हुआ करते थे। उनकी जगह अथर्व की मां वैदेही अंकोलेकर को बीईएसटी सरकारी बस सेवा में कंडक्टर की नौकरी मिल गई। उन्होंने नौकरी कर अपना परिवार भी चलाया और अथर्व को कभी निराश नहीं होने दिया। वह उसे हौंसला देती रहीं, अब उनके बेटे ने बेहतर प्रदर्शन कर खुद को साबित कर दिखाया है।

मां ​की ओर दिए गए कार के लालच ने सुधारा खेल

अपने बेटे के प्रदर्शन से खुश अथर्व की मां ने बताया कि छोटा भाई भी अंडर-14 क्रिकेट टीम में है। हमारी घर की आ​र्थिक स्थिति खराब होने से अथर्व रोज़ाना 15 किलोमीटर दूर बस से एमआईजी में प्रैक्टिस के लिए जाता था। उन्होंने कहा, ‘कई बार भारी किट और थकाऊ प्रैक्टिस के कारण वह क्रिकेट छोड़ने की सोचने लगता था। तब मैं उसे समझाती.. हौंसला देती और कहती.. बेटा अच्छा खेलो और कार खरीद लाे। उसमें मुझे भी घुमाना।’

अथर्व अंकोलेकर ने अपने पिता की मौत के बाद मां के संघर्ष को बहुत नज़दीक से देखा है। इस बात ने भी उन्हे ऑन फील्ड बेहतर प्रदर्शन के लिए हमेशा प्रेरित किया। अब अथर्व की कोशिश यही है कि उनकी मां बस कंडक्टर की नौकरी छोड़कर घर पर आराम करे। लेकिन अथर्व की मां वैदेही कहती हैं, ‘जैसी मेरी सेहत है, उसमें बस कंडक्टर की नौकरी करना आसान नहीं है। हर तरह के पैसेंजर होते हैं और उन्हें हैंडल करना होता है। जब कभी बस खराब हो जाती है तो डिपो भी जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आप बच्चों के पास घर नहीं जा सकते। लेकिन अथर्व के एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के बाद वैदेही अपने सारे कष्ट भूलकर खुशी का इज़हार करते हुए कहती है, ‘आज वो सब कुछ कोई मायने नहीं रखता। मुझे लगता है उसका फल सामने आया और अथर्व ने एक मुकाम हासिल किया।’

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नौ साल पहले तेंदुलकर को भी आउट कर चुका है अथर्व

अथर्व अंकोलेकर फिलहाल मुंबई के रिजवी कॉलेज में सेकंड ईयर के स्टूडेंट हैं। करीब 9 साल उन्होंने एक प्रैक्टिस मैच में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को आउट करने का कारनामा किया था। अंडर-19 टीम के लिए अथर्व का प्रदर्शन शानदार रहा और वह अब तक 7 मैच में 15 विकेट झटक चुका है। अगर बात करें फाइनल मैच में अथर्व अंकोलेकर के प्रदर्शन की तो उन्होंने 8 ओवर गेंदबाजी की और 2 मेडन फ़ेंके। उन्होंने मैच में कुल 28 रन देकर बांग्लादेश के 5 अहम विकेट लिए और उसे हारने पर मजबूर कर दिया।

Raj Kumar

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