राहुल गांधी विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा क्यों नहीं करते?

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राजस्थान में चुनावों के बारे में अभी से ही बहुत कुछ बता सकते हैं। राजस्थान में कांग्रेस अगर जीत भी जाती है तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि राजस्थान में बीजेपी लोकसभा चुनाव के दौरान खराब प्रदर्शन करेगी।

राजस्थान के चुनाव हमेशा बोरिंग से होते हैं क्योंकि मतदाता अपना मन बनाकर चलते हैं कि उन्हें हर पांच साल में सरकार बदलनी ही है।

अगर बात इतिहास की करें तो कहीं ना कहीं इस बार कांग्रेस की बारी है। लेकिन कांग्रेस परिवार में आपस में किस बात की खींच तान चल रही है उस पर भी गौर किया जा सकता है।

कांग्रेस फिलहाल यह तय कर पाने में असमर्थ है कि चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच संघर्ष इस तरह है कि ऐसा लगता है कि चुनाव उनके बीच है।

vasundhara raje
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फिर, राजस्थान में बीजेपी की हार निश्चित क्यों है क्योंकि वसुंधरा राजे सिंधिया अलोकप्रिय हो गई हैं। लेकिन स्थानीय लोगों की बात करें तो वो अब भी नरेन्द्र मोदी को पसंद करते हैं।

यदि बीजेपी राजस्थान में इसलिए हारती है क्योंकि इसका स्थानीय चेहरा उतना लोकप्रिय नहीं है तो यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को बरकरार रख सकता है क्योंकि इन दो राज्यों में स्थानीय चेहरे अभी भी लोकप्रिय हैं। 2003 से रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे हैं और 2005 से शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं।

दोनों राज्यों में विरोधी सत्ता की भावना बढ़ रही है लेकिन मतदाता मुख्य रूप से मुख्यमंत्री को लक्षित नहीं करते हैं। वे स्थानीय बीजेपी, उनके विधायकों, प्रणाली, नौकरशाही की शिकायते करते हैं लेकिन मुख्यमंत्री पर उनका गुस्सा कम ही दिखता है। यह अन्य कई मुख्यमंत्रियों के साथ में भी है। चाहे बिहार में नीतीश कुमार हों या ओडिशा में नवीन पटनायक या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी हों।

एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव जीतने में महत्वपूर्ण एक्स-फेक्टर है लेकिन राहुल गांधी को शायद ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने चुनाव से छह महीने पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को बनाया था। एक बड़े राज्य में एक अभियान के लिए छह महीने क्या हैं?

ऐसा नहीं है कि कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किया गया है। खुद उन्हीं का कहना है कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं। मैं वही करूंगा जो राहुल गांधी का निर्णय होगा।

यहां मतदाता सोचेंगे कि क्या वह मुख्यमंत्री बनेंगे? क्या वह हमारे लिए उत्तर देंगे? इस तरह कहीं ना कहीं कांग्रेस अपने स्थानीय नेताओं को कमजोर करती है।

बीजेपी स्थानीय मुख्यमंत्री के मुकाबले नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ना पसंद करती है लेकिन कम से कम जब बैठे मुख्यमंत्री लोकप्रिय हैं, तो वे उन्हें कमजोर नहीं करते। यह मोदी नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ में रमन सिंह अभियान है। यह मोदी नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान अभियान है।

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कर्नाटक में कांग्रेस ने इस साल की शुरुआत में अपने स्वयं के मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धाराय्याह का कद घटाया था। उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया था और राहुल गांधी के अभियान ने सिद्धाराय्याह को ढ़क दिया।

यह एक फर्जी तर्क है कि मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा पार्टी में गुटवाद को बढ़ावा देता है। गुटवाद के बावजूद कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं किया? असंतुष्टों को एक संयुक्त अभियान के लिए प्रोत्साहन और असंतोष देना होगा। एक सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं करना वास्तव में गुटवाद को बढ़ाता है।

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए एक सीएम चेहरा जीत और हार के बीच अंतर हो सकता था। एक व्यक्तित्व अभियान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ कांग्रेस की गोद में गिर सकता था। तो राहुल गांधी को यह समझ क्यों नहीं आता?

वह ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि अगर स्थानीय चेहरे के दम पर अगर चुनाव जीता जाता है तो क्रेडिट राहुल गांधी को कैसे मिलेगा।

arminder-singh with rahul gandhi
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एकमात्र ऐसा राज्य जहां कांग्रेस पार्टी ने 2014 से सरकार बनाई है वह पंजाब है। कभी सुना है कि किसी ने राहुल या सोनिया गांधी को श्रेय दिया हो? क्रेडिट कप्तान अमरिंदर सिंह को दिया जाता है और फिर भी अगर कुछ बचता है तो उसका क्रेडिट कप्तान के निजी अभियान सलाहकार प्रशांत किशोर को दिया जाता है।

ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी और अरमिंदर सिंह के रिश्ते काफी ज्यादा अच्छे हैं। राहुल गांधी अंत तक कैप्टन को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पसंद नहीं करते थे।

यदि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे के साथ चुनाव लड़े होते तो शायद उनको एक के बाद एक चुनाव हारने नहीं पड़ते।

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