क्यों भारतीयों के लिए कही हैमिल्टन की बात पर हमें सोचने की जरूरत है?

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हम भारतीयों ने कबड्डी, गुल्ली-डंडा, खो-खो के बाद धीरे-धीरे फॉर्मूला वन का नाम सुना और आज हम सभी इसके बारे में सबकुछ जानते हैं। फॉर्मूला वन खेल है या नहीं ये बहस लंबे समय से चल रही है पर कुछ भी नतीजा नहीं निकला है। लेकिन आज इस बहस में नहीं जाएंगे बल्कि बात करेंगे इस रेस के चैंपियन ड्राइवर लुईस हैमिल्टन की, जिन्होंने हाल ही में भारतीयों के बारे में कुछ ऐसा कहा है जिसके बाद सोशल मीडिया पर देशवासियों का खून उबाल मार रहा है।

सबसे पहले पढ़िए लुईस ने कहा क्या-

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में लुईस का कहना था कि “भारत जैसे गरीब देश में फॉर्मूला वन जैसे महंगे खेल आयोजित नहीं होने चाहिए”। अब यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर सभी के सामने आया लोग आग बबूला हो गए। किसी के अंदर का अंग्रेजों के समय वाला भारतीय जाग गया तो कोई भारत की अर्थव्यवस्था के आंकड़े गिनाने लग गया। अब ढ़ेरों भावनाओं में बंधे इस देश के लोगों में ऐसी फीलिंग आना स्वाभाविक है।

लेकिन….लेकिन…अभी पूरी कहानी बाकी है…

मामले ने तूल पकड़ा तो लुईस को सफाई देने के लिए आना पड़ा, वो भूल गए थे कि ये इंडिया है यहां माफी मांगने और सफाई देने का रिवाज है। लुईस ने जो सफाई पेश की उसने कई ट्रोलर्स और सोशल मीडिया पर उनका मखौल उड़ाने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया, कुछ सैकेंड्स के लिए ही सही।

लुईस ने कहा (इस बार सफाई में)-

लुईस ने सफाई पेश करते हुए कहा मुझे लगता है “कई लोग मेरे बयान से अपसेट हैं, भारत दुनिया में सबसे खूबसूरत देशों में से एक है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के साथ इसमें बेहद गरीबी भी है। जब मैं गरीबों के बीच से ड्राइव करते हुए फॉर्मूला वन के ऐसे ट्रैक पर पहुंचता हूं जहां पैसा कोई मायने नहीं रखता तो मुझे बड़ा अजीब लगता है। भारत ने करोड़ों रुपए ऐसे ट्रैक पर खर्च कर दिए जिनका अब कोई उपयोग नहीं है। इस पैसे से कई स्कूल और घर बनाए जा सकते थे.”।

अब बताइए सफाई पेश करने के साथ ही कई लोग सोशल मीडिया पर ही पिघल गए और समझदार इंडियन्स की तरह इतनी गहरी बात को तुरंत समझ गए।

फॉर्मूला वन रेस किसी देश की ब्रांडिंग के लिए होती है?

फॉर्मूला वन रेस को पिछले कुछ सालों में कई देशों में पॉपुलर हुई है। चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, आबु धाबी, बहरीन, रुस, अजरबैजान, टर्की जैसे देशों ने भी फॉर्मूला वन रेस का आयोजन करवाया है। भारत ने साल 2011 से लेकर 2013 तक इस रेस का आयोजन करवाया था उसके बाद यह ठंडे बस्ते में चली गई।

किसी भी देश के लिए इतना बड़ा इवेंट करवाना मतलब देश के कल्चर को प्रमोट करना, विदेशी लोगों के आने से अर्थव्यवस्था में तेजी लाने जैसे मकसद भी पूरे किए जाते हैं। ऐसे में अगर हम इसी भेड़चाल में फॉर्मूला वन रेस करवाएंगे तो लुईस हैमिल्टन की बात को गलत नहीं ठहरा सकते हैं।

अगर इसी पैसे का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने, शिक्षा, हैल्थकेयर, भूखमरी जैसी समस्याओं के लिए लगाया जाए तो असल मायने में भारत का नाम भीड़ में अलग चमकेगा।

वहीं अगर देखा जाए तो जो बात देश के एक आम नागरिक को अपनी सरकारों से करनी चाहिए वही बात एक विदेशी ने कही है।

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