सारे नियम कायदे गेंदबाजों के लिए ही क्यूं ??

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आज दुनिया में गिनती के कुछ ऐसे गेंदबाज बचे हैं जिनसे बल्लेबाज खौफ खाते हों। गौर करें तो आज ऐसा कोई गेंदबाज बचा ही नहीं जो अभी भी किसी बल्लेबाज के लिए पहेली बना हुआ हो या उसकी रफ्तार ऐसी हो कि बल्लेबाज डर के मारे ही अपना विकेट उसे दे जाए। बॉलरों की पीढ़ी खत्म करने का पूरा श्रेय आईसीसी और उसके बनाए हुए नियमों को जाता है। हां, इसमें फटाफट क्रिकेट का भी बड़ा हाथ है जहां मात्र 4 ओवर फेंकने आने वाले महान से महान गेंदबाज को भी बुरी तरह से पीट दिया जाता है क्योंकि नियम ही कुछ ऐसे हैं। आज आईसीसी की वजह से अच्छे गेंदबाजों की पीढ़ियां पनपनी बंद हो गई हैं। कभी अपने खतरनाक गेंदबाजों के लिए माने जाने वाली वेस्टइंडीज, पाकिस्तान, आॅस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की पेस फैक्ट्रियों में गेंदबाजों का अकाल सा पड़ गया है क्योंकि इन टीमों के पास गेंदबाज तो हैं मगर वो नियमों के दायरे में रहकर गेंदबाजी कर रहे हैं और वो सारे नियम बल्लेबाजों के पक्ष में बनते हैं। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक गेंदबाज शिव सिंह को उनके अजीबों गरीब एक्शन के कारण गेंदबाजी नहीं करने दी गई जबकि पूरी दुनिया के दिग्गज क्रिकेटरों ने उनके एक्शन को सही बताया और इसे एक बदलाव की संज्ञा दी। वेस्टइंडीज के सुनील नारायण काफी समय तक बल्लेबाजों के लिए अबूझ पहेली बने रहे मगर आईसीसी के नियमों ने नारायण को मुख्यधारा की क्रिकेट से हमेशा के लिए दूर कर दिया।
क्रिकेट में कई सालों से ऐसी गेंदबाजी नहीं देखने को मिल रही हैं जो कि 80 और 90 के दशक में हुआ करती थी। शुरूआती ओवरों में ही हमें गेंदबाजी देखकर पता चल जाता था कि मैच का रूख किस तरफ रहने वाला है। ओपनिंग बल्लेबाज उस समय पिच पर काफी देर तक असहज रूप से खड़े रहते थे मगर आज तो ओपनिंग बल्लेबाज गेंदबाजों पर चढ़कर खेलते हैं। कभी 250 का स्कोर खड़ा कर देने वाली टीम को पहले ही विजेता मान लिया जाता था मगर आज 350 का स्कोर बनाने वाली टीम भी मैच को हल्के में नहीं लेती। कारण साफ है कि पहाड़ जैसे स्कोर खड़ा करने के पीछे गेंदबाजों का दमन ही है।

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आज इंग्लैंड और आॅस्ट्रेलिया जैसे देश भी अपने यहां बल्लेबाजों की मदद करने वाली पिचें बनवा रही है और बॉलरों के लिए कुूछ नहीं किया जा रहा है। वेस्टइंडीज के खिलाड़ी पूरी तरह से टी-20 को समर्पित हो चुके हैं और हालत ये है कि इस देश से एक भी बॉलर आईसीसी की टॉप 10 लिस्ट में आता ही नहीं है। लीग टूर्नामेंट्स के कारण क्रिकेट में अब बल्लेबाजों का बोलबाला है क्योंकि लोगों का मानना है कि चौकों और छक्कों से ही एंटरटेनमेंट होता है। हो सकता है कि आने वाले समय में कोई गेंदबाज बनना ही ना चाहे और आईसीसी बॉलिंग मशीनों से गेंदबाजी कराने लग जाए। क्रिकेट के सभी प्रारूपों में एक गेंदबाज को जितनी दिमागी और शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है उतनी किसी को नहीं करनी पड़ती ऐसे में अगर वो कुछ नया प्रयोग कर भी लें तो इससे किसी को भी परहेज नहीं होना चाहिए।

 

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आज ऐसे कई शानदार गेंदबाज हैं जो संदिग्ध एक्शन के आरोपों के चलते क्रिकेट से बहुत दूर हो गए लेकिन जब तक वो मैदान पर गेंदबाजी करा रहे थे बल्लेबाजों पर हमेशा आउट होने का संकट बना रहता था। क्रिकेट को जिंदा रखने में जितना श्रेय बल्लेबाजों को जाता है उतना ही श्रेय गेंदबाजों को भी जाना चाहिए क्योंकि फेंकी गई 50 बॉलों में से कोई एक या दो बार ही उसके पास जश्न मनाने का लम्हा आता है बाकि समय गेंदबाज चौकों छक्कों की बरसात में अपने आपको ठगा सा महसूस किए हुए खड़ा रहता है।

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