स्पेशल: जब राहुल गांधी ने अपना नाम बदलकर लिया था एमफिल में प्रवेश

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पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और वर्तमान में वायनाड़ सांसद राहुल गांधी आज 19 जून को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। कांग्रेस नेता के जन्मदिन को पार्टी ने सेवा दिवस मनाने का फैसला किया है। भारतीय राजनीति में दशकों से सक्रिय नेहरू-गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य राहुल के पास नेहरू, इंदिरा या राजीव गांधी जैसा करिश्माई प्रभाव तो नहीं हैं, लेकिन उनसे हमेशा ही उसी जादू की उम्मीद की जाती रही है। राहुल गांधी के कई शुभचिंतक और राजनीतिक विश्लेषक उन्हें फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की वकालत करते रहे हैं। लेकिन अबतक उनकी मां सोनिया गांधी ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई है। राहुल साल 2019 के आम चुनाव में दो जगह से चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के गढ़ अमेठी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में कुछ दिलचस्प बातें…

देहरादून में दून स्कूल में हुई शुरुआती पढ़ाई

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को दिल्ली में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के घर में हुआ था। उनकी मां का नाम सोनिया गांधी है। वह अपने माता- पिता की पहली संतान हैं। राहुल का बचपन दिल्ली और देहरादून में बीता। वो अपने शुरुआती जीवन में सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। जब वे पैदा हुए थे तब उनकी दादी इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं। राहुल गांधी ने वर्ष 1981 से 1983 के बीच उत्तराखंड के देहरादून में स्थित दून स्कूल में पढ़ाई की जहां उनके पिता भी पढ़े थे।

जब राहुल को बहन के साथ घर पर लेनी पड़ी शिक्षा

राहुल गांधी की पढ़ाई में सबसे पहली बार व्यवधान तब हुआ जब उनकी दादी इंदिरा गांधी की वर्ष 1984 में हत्या कर दी गई। सुरक्षा खतरों को देखते हुए राहुल और उनकी बहन प्रियंका गांधी को वर्ष 1989 तक घर पर ही शिक्षा लेनी पड़ी थी। वर्ष 1989 में राहुल गांधी ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज में स्नातक की शिक्षा के लिए स्पोर्ट्स कोटा से दाखिला लिया। उस समय उनकी रैंगिंग की तस्वीर ने खूब हलचल मचाई थी।

फ्लोरिडा में रोलिन्स कॉलेज से किया बीए

वर्ष 1990 में राहुल गांधी ने अर्थशास्त्र के अध्ययन के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था, लेकिन साल 1991 में उनके पिता राजीव गांधी की लिट्टे आंतकियों ने हत्या कर दी। इस घटना के बाद वो सुरक्षा कारणों से अमेरिका के फ्लोरिडा में रोलिन्स कॉलेज में चले गए, जहां से उन्होंने वर्ष 1994 में बीए की डिग्री हासिल की। साल 1995 में राहुल ने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंड स्टडीज में एमफिल करने के प्रवेश लिया। यहां भी परिवार की सुरक्षा के खतरे ने राहुल का पीछा नहीं छोड़ा और इसी वजह से उनका नाम कॉलेज डॉक्यूमेंट में सु राहुल विंसी लिखवाया गया था।

सलाहकार फर्म के साथ लंदन में 3 साल तक काम किया

अपनी स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद राहुल गांधी ने एक मॉनिटर ग्रुप नाम की सलाहकार फर्म के साथ लंदन में तीन साल तक काम किया था। इस ग्रुप की स्थापना माइकल पोर्टर ने की थी। वर्ष 2002 में वे मुंबई की एक तकनीकी आधारित आउट सोर्सिंग कंपनी बैकोप्स सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक बन गए।

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राहुल गांधी का साल 2004 में हुआ राजनीति में राज्याभिषेक

राहुल गांधी ने वर्ष 2004 में राजनीति में एंट्री ली और इसके बाद से उन पर नेहरू-गांधी परिवार की विरासत के रूप में कांग्रेस पार्टी को संभालने का सवाल हमेशा से किया जाता रहा। मई 2004 में उन्होंने उत्तरप्रदेश में अपने पिता राजीव गांधी की संसदीय सीट अमेठी से चुनाव लड़ा और लोकसभा के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद से वो लगातार अमेठी से जीतते आ रहे थे लेकिन साल 2019 के आम चुनाव में उन्हें भाजपा की स्मृति के सामने हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, राहुल गांधी को दूसरी सीट वायनाड से इस चुनाव में जीत मिली थी, जिसकी वजह से वो एक बार फिर सांसद चुने गए।

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