राजस्थान : टिकट बंटवारे में की गई मनमर्जी राजे पर पड़ सकती है भारी

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राजस्थान विधानसभा चुनावों को लेकर हाल ही में बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के टिकट फाइनल कर दिए हैं जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि टिकट बंटवारे में इस बार भी वसुंधरा राजे की ही चली है। आलाकमान की लाख कोशिशों के बाद भी राजे अपनी पसंद-नापसंद को मजबूती से सामने रख पाई है।

राजे का दबदबा बरकरार है इसमें कोई दो राय नहीं है और इस बात का अंदाजा आप बीजेपी की पहली लिस्ट से लगा सकते हैं क्योंकि जिन 131 उम्मीदवारों के नाम तय हुए हैं उनमें 85 मौजूदा विधायक हैं जो राजे की तरजीह पर तय हुए हैं। कम से कम 50 परसेंट विधायकों के टिकट ना काटने की जिद्द पर अड़ी रही राजे ने आखिर अपनी बात मनवा ही ली, लेकिन कहीं ना कहीं ये जिद्द आगे चलकर राजे के लिए खतरे का कारण भी बन सकती है, आइए समझते हैं कैसे ?

मुख्यमंत्री का फीडबैक कहीं ना पड़ जाएं उल्टा-

उम्मीदवारों का नाम फाइनल करने से पहले बीजेपी ने पार्टी की ओर से एक सर्वे करवाया था। उसी सर्वे के आधार पर आलाकमान टिकटें देने जा रहा था। लेकिन राजे ने टिकट के लिए खुद का फीडबैक भी तैयार किया और किसी की ना सुनते हुए अपने फीडबैक के आधार पर ही सभी को टिकट दिला लाई। ऐसे में अगर फीडबैक के अनुरूप उम्मीदवार प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं तो आलाकमान के सामने राजे बोलने जैसी स्थिति में नहीं रहेगी।

इतनी जिद्द राजे के लिए बन सकती है खतरा-

एक बार के लिए देखें यह मालूम पड़ता है कि बीजेपी हाईकमान ने राजे के आगे घुटने टेक दिए लेकिन बीजेपी यह भी जानती हैं कि अगर इस बार राजस्थान में कांग्रेस वापसी करती है तो हार का ठीकरा भी राजे के सिर ही फूटेगा। ऐसे में आलाकमान के सामने राजे लोकसभा चुनावों में अपनी जिद्द नहीं चला पाएगी।

वहीं राजे को लेकर प्रदेश की जनता में पहले से ही महारानी की इमेज बनी हुई हैं ऐसे में अपना दबदबा कायम रखने की इस धुन में लोगों के बीच राजे के लिए एक गलत संदेश भी जा सकता है।

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