पुण्यतिथि: अपने घर की लिफ्ट में एक हादसे का शिकार हो गए थे वसंत देसाई

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Vasant -Desai-Biography

वसंत देसाई भारतीय संगीत की दुनिया का एक जाना पहचाना नाम हैं। आज वसंत साहब की 46वीं पुण्यतिथि है। वसंत देसाई के गीत ‘हमको मन की शक्ति देना’ और ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ ना सिर्फ हिंदुस्तान, बल्कि पाकिस्तान की हर स्कूल एसेंबली में आज भी गाए जाते हैं। संगीतकार वसंत कुमार देसाई का जन्म 9 जून, 1912 में गोवा के कुदाल क्षेत्र में हुआ था। देसाई का बचपन से ही रुझान संगीत की दुनिया में था। एक वजह यह भी रही कि वसंत जहां से थे, वहां का संगीत काफी प्रबल था। यहां के धार्मिक, पौराणिक नाटकों में संगीत होता था। ऐसा कहा जा सकता है कि उनकी असल संगीत यात्रा यहीं से शुरू हुई। इस अवसर पर जानिए उनके जीवन के बारे में…

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संगीत नहीं बल्कि अभिनय से की कॅरियर की शुरुआत

संगीत के प्रति अपने जूनून के साथ वे महाराष्ट्र से कोल्हापुर आ गए। कॅरियर के शुरुआती दौर में वसंत ने वी. शांताराम के साथ काम शुरू किया था संगीतकार के रूप में नहीं, ऑफिस ब्वॉय के रूप में। यहीं से उनकी किस्मत पलटी और उन्हें फिल्मों में अभिनय का मौका मिला। साल 1930 में ‘प्रभात फ़िल्म्स’ की एक मूक फ़िल्म “खूनी खंजर” में उन्हें एक्टिंग करने का मौका मिला। संगीतकार के रूप में उनकी पहली मराठी फिल्म थी। जो साल 1932 में अयोध्या का राजा थी, जिसमें उन्होंने जय जय राजाधिराज गाने को आवाज दी। वसंत देसाई को असल पहचान साल 1934 में रिलीज हुई फ़िल्म “अमृत मंथन” के गाने बरसन लगी…से मिली। बसंत ने संगीत कॅरियर में पार्श्वगायन और संगीतकार में से संगीतकार बनना चुना।

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पाकिस्तान के स्कूलों में गूंजती है जिनकी धुन

संगीतकार के रुप में कॅरियर संवारने के लिए उन्होंने उस्ताद आलम ख़ान और उस्ताद इनायत ख़ान जैसे ख्याति प्राप्त शख्सियतों से संगीत की बारिकियां सीखी। वसंत ने साल 1942 में आई फ़िल्म ‘शोभा’ के जरिए बतौर संगीतकार कॅरियर की शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने वी. शांताराम के साथ काम करना शुरु कर दिया और एक के बाद एक कई हिट संगीत हिंदी सिनेमा और श्रोताओं को दिया।

इनमें ‘आंखें बारह हाथ’ की प्रार्थना ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ देश ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के कई स्कूलों की प्रार्थना बनी जो आज भी कायम है। वसंत की ही गुड्डी फिल्म की प्रार्थना ‘हमको मन की शक्ति देना’ भी कई दशकों तक स्कूल की प्रार्थना में शामिल रहीं। उन्होंने करीब 4 दशक तक संगीत की दुनिया में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया। 22 दिसंबर, 1975 का वो दिन जब वे अपने घर की लिफ्ट में एक हादसे के शिकार हो गए। अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई।

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