डेमेज कंट्रोल में जुटी बीजेपी, राजे के हाथ में नहीं सब कुछ

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राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के 200 में से 162 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस महज 21 सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी। तब मोदी लहर का असर राजस्थान में भी दिखा था लेकिन, इस बार इस तरह की कोई लहर नहीं दिख रही है बल्कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ माहौल जरूर दिख रहा है।

वसुंधरा के खिलाफ नाराजगी देखते हुए भाजपा डेमेज कंट्रोल करने की कोशिश में जुटी है। इस साल हुए अजमेर और अलवर लोकसभा के उपचुनाव और मांडलगढ़ के विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इसे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ गुस्से के तौर पर देखा गया था। अब पार्टी आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए ही पहले वसुंधरा के हाथों में चुनाव की पूरी कमान सौंपने के बजाए कई नेताओं को अपने तरीके से चुनाव अभियान की कमान सौंपी है।

कटेंगे कई टिकट

दूसरी तरफ अब कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की तैयारी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार 162 विधायकों में से एक तिहाई से ज्यादा विधायकों के टिकट भी कट जाएं तो बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पार्टी इंकमबेंसी फैक्टर को कम करने के लिए इस तरह की तैयारी कर रही है। इसके लिए पार्टी आलाकमान ने हर विधायक की रिपोर्ट मंगाई है, जिसके आधार पर ही टिकट का फैसला होगा। विधायक को टिकट उनके परफॉरमेंस और रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही तय होगा, भले ही वो विधायक कितने भी दिनों से अपने क्षेत्र से विधायक क्यों न हो। हालांकि, इसके पहले विधानसभा चुनाव या फिर लोकसभा चुनाव में राजे की ही मनमानी चलती रही है, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष भी अब तक उन्हीं के गुट के रहे हैं। अब पहली बार वसुंधरा पार्टी के अंदर ही घिर गई हैं। पार्टी आलाकमान को अंदाजा है कि अगर विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन  खराब हुआ तो फिर उसका असर लोकसभा चुनाव में भी पड़ सकता है।

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