तबला वादक लच्छू महाराज ने इस वजह से ‘पद्मश्री’ सम्मान लेने से कर दिया था इंकार

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भारत के सुप्रसिद्ध तबला वादक रहे लच्छू महाराज की आज 76वीं जयंती है। वे तबला वादन के बनारस घराने से ताल्लुक रखते थे, क्योंकि उन्होंने तबला वादन की शिक्षा इसी घराने से ली थी। उन्होंने अपनी पहली परफॉर्मेंस मुंबई में दी थी, तब उनकी उम्र महज़ आठ साल थीं। जब देश में आपातकाल लगा हुआ था, तब लच्छू महाराज ने जेल के अंदर विरोध के लिए तबला वादन किया था। ऐसे में इस ख़ास मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें..

लच्छू महाराज का जीवन परिचय

लच्छू महाराज का जन्म 16 अक्टूबर, 1944 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनके पिता का नाम वासुदेव नारायण सिंह था। उनकी बहन निर्मला थी जो एक्टर गोविंदा की मां थी। उनका मूल नाम लक्ष्मी नारायण सिंह था, परंतु प्रसिद्ध तबला वादक होने की वजह से उन्हें लच्छू महाराज के नाम जाना जाने लगा। उन्होंने टीना नामक फ्रांसीसी महिला से शादी की और उनके एक बेटी नारायणी थी।

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चारों घरानों की ताल एक कर लेते थे लच्छू महाराज

लच्छू महाराज बनारस घराने के थे, परंतु उनके तबला वादन में वह खासियत थी कि वह चारों घरानों की ताल एक कर लेते। उनका गत, परन, टुकड़ा कमाल का था। उन्होंने कभी किसी की फरमाइश पर तबला नहीं बजाया। उन्होंने अपने तबला वादन से देश-विदेश में कई बड़े आयोजन किए। उन्होंने अपने तबले की थाप पर लोगों को खूब झूमने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने 8 साल की उम्र में मुंबई के एक कार्यक्रम में तबला वादन किया, जिसे देखकर मशहूर तबला वादक नवाज अहमद जान थि‍रकवा ने कहा था ‘काश लच्‍छू मेरा बेटा होता।’

लच्छू महाराज को केंद्र सरकार की ओर से देश के चौ​थे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ देने के लिए नामित किया गया, परंतु उन्होंने यह कहते हुए अवॉर्ड लेने से मना कर दिया कि किसी कलाकार को अवॉर्ड से ज्यादा श्रोताओं की वाह और तालि‍यों की गड़गड़ाहट ही पुरस्‍कार होता है।

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वाराणसी में हुआ लच्छू महाराज का निधन

लंबी अवधि तक बीमार रहने के बाद 27 जुलाई, 2016 को उनका वाराणसी में 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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