राजनीति में आने से बचना चाहती थी सोनिया गांधी, जानें उनका राजनीति में आने का कारण

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इटली में जन्मी और भारत में देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की अध्यक्ष पर रह चुकी सोनिया गांधी 9 दिसंबर को अपना 73वां बर्थडे हैं। वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वर्तमान में रायबरेली से सांसद हैं। सोनिया ने वर्ष 1998 में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बनी और उन्नीस वर्ष तक इस पद पर रही।

जीवन परिचय

सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर, 1946 को इटली के विसेन्जा के एक गांव लूसियाना में हुआ। उनके पिता स्टेफिनो मायनो थे जो कि भूतपूर्व फासिस्ट सिपाही ​थे। उनका बचपन ट्यूरिन के पास ओर्बास्सान नामक शहर में बिताया। उनकी आरंभिक शिक्षा एक कैथोलिक स्कूल में हुई।

उन्होंने विश्वविद्यालय के रेस्तरां में काम किया और वहां 1965 में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। राजीव गांधी तब कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ रहे थे।

राजीव और सोनिया ने की शादी

बाद में वह उच्च शिक्षा के लिए वर्ष 1964 में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर चली गईं। यहां पर उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई की। इसके एक साल बाद वर्सिटी रेस्टोरेंट में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो उस समय कैंब्रिज विश्वविद्यालय में ट्रिनिटी कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे।

राजीव गांधी से उनकी पहली बार मुलाकात इसी रेस्टोरेंट में हुई थी। सोनिया और राजीव की मुलाकात धीरे—धीरे प्यार में बदल गई। बाद में वर्ष 1968 में दोनों ने हिंदू रीतिरिवाज से शादी कर ली। जिसके बाद सोनिया गांधी भारत आ गईं और 1983 में उन्होंने भारतीय नागरिकता स्वीकार कर ली।

जब राजीव एयर इंडिया में विमान चालक थे तब सोनिया अपनी सास और प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ रही। सोनिया ने खुद को भारतीय परिवेश में ढाल लिया। इसी बीच सोनिया ने एक बेटा राहुल और एक बेटी प्रियंका को जन्म दिया।

राजनीति में नहीं आने से बचना चाहती थी सोनिया

गांधी परिवार शुरु से ही राजनीति में था। राजीव ने अपना कॅरियर एक पायलट के रूप में शुरू किया था। लेकिन जब 23 जून, 1980 को एक विमान दुर्घटना में अपने छोटे भाई संजय गांधी का देहांत हो गया, इसके बाद वर्ष 1982 में राजीव ने राजनीति में प्रवेश किया। इस दौरान सोनिया ने अपना पूरा ध्यान परिवार पर केंद्रित किया। वह जनता के साथ संपर्क से परहेज करती थी।

वर्ष 1984 में पीएम इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई तो इस घटना ने गांधी परिवार को तोड़ दिया। राजीव ने देश का नेतृत्व किया। बाद में वर्ष 1991 में राजीव गांधी की चुनाव प्रचार के दौरान आत्मघाती बम धमाके में हत्या कर दी गई। तो सोनिया पर संकट आ गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता उन्हें कांग्रेस की कमान सौंपना चाहते थे, लेकिन वह मना करती रही। पति की हत्या के बाद तो उन्होंने राजनीति से मुंह फेर लिया था।

लेकिन पार्टी को संकट में देख सोनिया ने वर्ष 1997 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और वर्ष 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि उनके विदेशी मूल के होने पर भारतीय राजनीति में काफी विवाद हुआ। लेकिन वह आजादी के बाद कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली पहली विदेशी बनीं।

वर्ष 1999 में बनीं लोकसभा में विपक्ष की नेता

सोनिया गांधी ने वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश के अमेठी से चुनाव जीता। वह 13वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता चुनी गईं। इसके बाद वर्ष 2004 के आम चुनावों में उनकी अगुवाई में कांग्रेस ने देश की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) बनाया और एनडीए को करारी शिकस्त दी।

उनके नेतृत्व में संप्रग ने लगातार वर्ष 2009 में सरकार बनाई। इन दोनों सरकारों में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह को सौंपी। वह वर्ष 2009 के आम चुनावों में रायबरेली से लड़ी और जीत दर्ज की। वह वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के आम चुनावों में रायबरेली से लड़ी और जीत दर्ज की।

सोनिया गांधी को मिले सम्मान

उन्हें वर्ष 2004 में फोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली महिला के रूप में स्थान दिया। वर्ष 2006 में उन्हें ब्रुसेल्स विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। सोनिया को वर्ष 2006 में बेल्जियम सरकार द्वारा ऑर्डर ऑफ किंग लियोपोल्ड से सम्मानित किया गया।

वर्ष 2007 में फोर्ब्स पत्रिका ने एक बार फिर उन्हें दुनिया की छठी सबसे शक्तिशाली महिला के रूप में दिखाया। वर्ष 2007 और 2008 में टाइम द्वारा उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक के रूप में नामित किया गया था।

सोनिया को वर्ष 2008 में मद्रास विश्वविद्यालय से साहित्य में मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई थी। वर्ष 2009 में, फोर्ब्स पत्रिका द्वारा सोनिया गांधी को दुनिया की नौवीं सबसे शक्तिशाली महिला के रूप में वर्णित किया गया था। वर्ष 2010 में एक ब्रिटिश पत्रिका न्यू स्टेट्समैन ने सोनिया को दुनिया के पचास सबसे प्रभावशाली लोगों में स्थान दिया था।

उन पर रानी सिंह ने ‘सोनिया गाँधीः एन एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ एन इंडियन डेस्टिनी’ नामक जीवनी लिखी। इसमें सोनिया गाँधी और उनके परिवार के जीवन में संघर्ष और घटनाओं के बारे में थी।

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