सर जे.सी. बोस ने तीन साल तक बिना सैलरी काम करने के बाद अंग्रेजों से मनवा ली थी अपनी मांग

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पेड़-पौधों में इंसानों जैसी भावनाओं का पता लगाने वाले महान भारतीय भौतिक शास्त्री वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस (Sir JC Bose) की आज 163वीं जयंती है। प्रोफेसर जे.सी. बोस ने अपनी खोज से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने का भी काम किया था। बोस को दुनिया एक वैज्ञानिक के तौर पर जानती हैं। वह कलाप्रेमी होने के साथ-साथ साहित्य के भी अच्छे जानकार थे। बोस बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।

रेडियो (Radio) और माइक्रोवेव ऑप्टिक्स (Microwave Optics) के अविष्कार का श्रेय़ भी सर जगदीश चंद्र बोस उन्हीं को जाता है। इसके अलावा आधुनिक वाई-फाई (Wi-Fi) की खोज का क्रेडिट भी बोस को ही दिया जाता है। अपने जमाने में ये जेसी बोस के नाम से भी जाने गए। बोस ने विज्ञान शोध के क्षेत्र को एक नया आयाम देने में भी अहम भूमिका निभाई थी। इस खास मौके पर जानिए उनके जीवन के बारे में कुछ अनसुनी बातें…

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बोस की जीवन शैली में नज़र आती थी सादगी

सर जगदीश चंद्र बोस का जन्म 30 नवम्बर, 1858 को बंगाल प्रांत में मेमनसिंह नगर के ररौली गांव में हुआ था, जो भारत के बंटवारे के बाद अब बांग्लादेश के मुंशीगंज जिले में आता है। बोस की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई थी। उन्होंने पूरे जीवन सादगी को अपनाए रखा। एक ब्रह्म समाजी परिवार में जन्मे जे.सी. बोस ने जिंदगी के हर मोड़ पर अपने पिता से जीवन बिताने की सीख लीं। भारतीय वैज्ञानिक बोस ने ब्रिटिश-भारतीय महिला अबाला से प्रेम विवाह किया था, जो कि एक सोशल वर्कर थीं।

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जब जे. सी. बोस ने अंग्रेजी हुकूमत को झुकाया

वर्ष 1985 में सर जगदीश चंद्र बोस बोस कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर नियुक्त हुए। उस दौरान ब्रिटिश हुकूमत भारतीय शिक्षकों को अंग्रेजी शिक्षकों के मुकाबले बहुत कम सैलरी दिया करती थी। बोस इस बात से काफी नाराज़ हुए और इसके खिलाफ़ अपनी आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया। आखिरकार करीब 3 साल तक बिना सैलरी के काम करने के बाद बोस ने ब्रिटिश हुकूमत से अपनी समान वेतन की मांग मनवा ली।

आइए जानते हैं जगदीश चंद्र बोस के बारे में कुछ ख़ास बातें…

–  महान वैज्ञानिक जे.सी. बोस ने वर्ष 1884 में नेचुरल साइंस में ग्रेजुएशन किया था। उसके बाद उन्होंने ब्रिटेन में लंदन यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई भी की थी।

–  जब बोस ने यह साबित करके दिखाया कि पौधों में जीवन होता है, इससे पूरी दुनिया बोस की प्रतिभा को पहचान गईं। जगदीश चंद्र बोस ने अपने प्रयोग में पौधे की जड़ को स्क्रीन पर हिलते हुए दिखाया जोकि उसकी धड़कन थी।

– जे.सी. बोस के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि वायरलैस रेडियो भी उन्हीं का आइडिया था, हालांकि बाद में इसका क्रेडिट मार्कोनी को मिला।

– बंगाली साइंस फिक्शन भी वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस की देन कहा जाता है।

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