शर्मिला टैगोर:हिंदी सिनेमा की वो अदाकार जिसने फिल्मों में अभिनेत्रियों की पारंपरिक छवि को बदलने का बीड़ा उठाया

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शर्मिला टैगोर हिंदी सिनेमा की उस दौर की सशक्त अभिनेत्रियों में से एक थी। सिने पर्दे पर उनकी दमदार एक्टिंग और अदाओं का कोई सानी नहीं। अपने दमदार अभिनय से उन्होंने कई दशकों तक फिल्मी पर्दे पर राज किया। शर्मिला टैगोर का जन्म 8 दिसंबर, 1946 को आंध्रप्रदेश के हैदराबाद में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ। वो भले ही यहां जन्मी हो मगर उनका अधिकतर बचपन कलकत्ता में बीता।

आपको जानकर हैरानी होगी मगर शर्मिला टैगोर ठाकुर रविंद्रनाथ ठाकुर की प्रपौत्री हैं। वहीं उनके पिता गितिन्‍द्रनाथ टैगोर तत्‍कालीन एल्गिन मिल्‍स के ब्रिटिश इंडिया कंपनी के मालिक थे। शर्मिला पढ़ाई में बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। स्कूल में उनकी प्रजेंस बेहद कम हुआ करती थी। जिसकी वजह से उन्हें क्लास में शर्मिंदा होना पड़ता था।

एक्टिंग कॅरियर की शुरुआत

शर्मिला ने महज 13 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने सत्यजीत रॉय की फिल्म अपूर संसार से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। अपनी पहली ही फिल्म से शर्मिला ने अपनी बेहतरीन अदायगी से सभी का दिल जीत लिया और बेहद कम उम्र में कामयाबी हासिल की। जिसके बाद उन्हें देवी, नायक, सीमाबध्द जैसी फिल्मों में काम करने का मौका मिला।

सिनेमा में इस बदलाव के लिए शर्मिला को जाता है श्रेय

शर्मिला की बेहतरीन अदायगी ने उन्हें लोगों का चहेता बना दिया था। फिल्मों में उनकी डिमांड बढ़ने लगी। शर्मिला ने भी फैंस को अपनी फिल्म के जरिए कुछ नया परोसने की सोची। जी हां वो शर्मिला ही थी जिसने सिने पर्दे पर अभिनेत्रियों की पारंपरिक छवि को हटाकर फिल्मों में बोल्ड सीन्स की शुरुआत की। शर्मिला टैगोर पहली भारतीय अभिनेत्री थी जिन्होंने साल 1967 में आई फिल्म में बिकिनी पहनी। जिसके बाद वह हिंदी सिनेमा में सेक्स सिंबल के रूप में जानी जाने लगी। यही नहीं साल 1968 में पहली बार उन्होंने फैशन मैग्जीन फिल्मफेयर के लिए बिकिनी पोज दिया।

प्यार की खातिर बदला धर्म

इतनी बड़ी एक्ट्रेस होना और जिंदगी में कुछ दिलचस्प ना हो भला ऐसे कैसे हो सकता है। शान शौकत शोहरत हासिल करने के बावजूद शर्मिला की जिंदगी में प्यार की कमी थी जिसे मंसूर अली खान पटौदी ने पूरा किया। मंसूर अली खान उस दौर में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हुआ करते थे। दोनों के बीच प्यार हुआ और साल 1968 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद शर्मिला ने अपना नाम आयशा सुल्‍ताना रखा। हालांकि इस नाम का इस्तेमाल उन्होंने और उनके परिवार ने कभी नहीं किया। शर्मिला सैफ़ अली ख़ान, सबा अली खान, और सोहा अली ख़ान की मां हैं। नवाब पटौदी का सितंबर, 2011 में निधन हो गया था।

बेहतरीन फिल्में

अनुपमा (1966), देवर (1966), एन इवनिंग इन पेरिस (1967), आराधना (1969), सत्यकाम (1969), तलाश (1969), सफर (1970), अमर प्रेम (1971), बंधन (1971), छोटी बहू (1971), आविष्कार (1973), दाग (1973), अमानुष (1974), चुपके चुपके, मौसम (1975), नमकीन (1982), दूसरी दुल्हन (1983), न्यू दिल्ली टाइम्स (1985), विरुद्ध (2005), ज्वैलरी बॉक्स (2006), एकलव्य (2007), तस्वीर 8 बाय 10 (2009), मार्निंग वॉक (2009) जैसी फिल्में शामिल हैं।

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