अपने समय के समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य से तीखा प्रहार करते थे शरद जोशी

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Sharad-Joshi

अपने समय में अनूठे व्यंग्यकार, कवि, लेखक और फिल्म स्क्रिप्ट राइटर शरद जोशी की आज 5 सितंबर को 28वीं पुण्यतिथि हैं। शरद जोशी ने अपनी व्यंग्य शैली से देश में घटित सामाजिक, राजनीतिक, कुरीतियों और तात्कालिक विसंगतियों पर कुशलता के साथ तीखा प्रहार किया। उनके व्यंग्य सीधे पाठकों के दिलोदिमाग में बैठ जाते थे। उन्हें वर्ष 1990 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

आरंभिक जीवन

शरद जोशी का जन्म 21 मई, 1931 को मध्यप्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास और माता शांति जोशी थी। उन्होंने बचपन से ही लेखन कार्य शुरू कर दिया था।

वर्ष 1950 के दशक के अंत में जब शरद इंदौर में समाचार पत्रों और रेडियो के लिए लेखन कार्य करते थे, तब उनकी मुलाकात इरफाना सिद्दीकी से हुई। धीरे—धीरे दोनों एक—दूजे को जानने लगे और पसंद करने लगे। बाद में दोनों ने शादी कर ली। इरफाना एक लेखक, रेडियो कलाकार और भोपाल में थिएटर एक्ट्रेस थी। उनके तीन बेटियां हुई बानी, ऋचा और नेहा शरद। नेहा शरद एक अभिनेत्री और कवियित्री हैं।

साहित्यिक रचनाएं

शरद जोशी मुख्य रूप से तो व्यंग्यकार हैं लेकिन उन्होंने हिंदी की अन्य विधाओं पर भी रचनाएं लिखी हैं। उन्होंने फिल्म, धारावाहिक, नाटक, निबंध आदि पर भी लिखा।

उनकी प्रमुख रचनाएं

व्यंग्य संग्रह:
परिक्रमा, किसी बहाने, तिलिस्म, रहा किनारे बैठ, मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ, दूसरी सतह, हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे, यथासंभव, जीप पर सवार इल्लियां

फिल्म लेखन:
क्षितिज (1974), छोटी सी बात (1975), सांच को आंच नहीं (1979), गोधुली (1977), चोरनी (1982), उत्सव (1984), मेरा दमाद (1990), दिल है कि मानता नहीं (1991), उदान (1997)

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टीवी सीरियल लेखन

ये जो है जिन्दगी, विक्रम और बेताल, वाह जनाब, सिंहासन बत्तीसी, देवी जी, प्याले में तूफान, दाने अनार के, ये दुनिया गजब की

उनके दो व्यंग्य नाटक ‘अन्धों का हाथी’ और ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खां’ आज तक चर्चित हैं।

शरद जोशी की स्मृति में मध्यप्रदेश सरकार ने उनके नाम ‘शरद जोशी सम्मान’ पुरस्कार की स्थापना की है। यह प्रति वर्ष लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए लेखकों को दिया जाता है। इसके अंतर्गत पुरस्कार स्वरूप 51,000 और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं।

निधन

शरद जोशी का निधन 5 सितंबर, 1991 को हुआ।

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