31 अक्टूबर को नहीं आता सरदार पटेल का जन्मदिन, जानिए ‘लौह पुरूष’ के बारे में ऐसे ही कुछ रोचक तथ्य

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भारत निर्माण में अपनी अहम भुमिका निभाने वाले लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज 143वी जयंति है। भले ही आज हम ये मानते हो कि सरदार पटेल का जन्म आज ही के दिन हुआ था मगर आधिकारिक तौर पर आज तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। पटेल की सही जन्मतिथी का उल्लेख नहीं है और उनकी जन्मतिथी का प्रमाण केवल उनकी माध्यमिक शिक्षा के कागजों से ही होता है।

22 साल की उम्र में की थी स्कूली शिक्षा आरंभ: 22 साल की उम्र जिसमें आज युवा अपनी पोस्टग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं पटेल ने इस उम्र में आकर अपनी स्कूली पढ़ाई बामुश्किल पूरी की थी। मगर उन्होनें 36 साल की उम्र में महज 30 महीनों के अंदर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की और एक कामयाब बैरिस्टर भी बने। पटेल ने अपनी कॉलेजी शिक्षा इंग्लैंड में रहते हुए पूरी की जिसके बाद वो वापस भारत आ गए। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें यहां बैरिस्टर की नौकरी के लिए कई बार निमंत्रण दिया मगर उन्होनें ये नौकरी नहीं की।

पश्चिमी रहन सहन से काफी प्रभावित थे पटेल: सरदार पटेल पश्चिम के रहन सहन और पहनावे से काफी प्रभावित थे और वो वहीं के लोगों की तरह कपड़े पहना करते थे। बावजूद इसके उन्होनें गांधीजी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन का पूरा समर्थन किया और विदेशी कपड़े जलाने में सबसे आगे रहे।

महीने में दो बार व्रत रखते थे इसलिए लौह पुरूष मिला नाम: किसान परिवार में जन्में पटेल अपने पिता के साथ खेतों में काम किया करते थे और महीने में दो बार व्रत रखते थे। पूरा दिन भूखे रहकर भी अपने पिता का खेतों में हाथ बंटाते थे जिसके कारण उन्हे लौह पुरूष नाम मिला।

रानी लक्ष्मीबाई की सेना में थे पटेल के पिता: बहुत ही कम लोग जानते हैं मगर सरदार पटेल के पिता झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना में अहम योगदान दे चुके हैं।

 

 

गुजराती को सरदार क्यों कहा जाने लगा: सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म गुजरात के नाडियाद जिले में हुआ था। मगर बहुत लोगों के ये बात हैरान करने वाली लगती है कि पटेल के नाम के आगे सरदार क्यों लगाया जाता है। दरअसल पटेल को सरदार की उपाधि उनके साथ काम करने वालों ने दी थी क्योंकि उन्होनें कर्ज माफी और भूमि निस्तारण के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी और जीते भी।

भारतीय प्रशासनिक सेवा इन्ही की देन: देश के सबसे प्रतिष्ठित सेवा भारतीय सिविल सेवा जो कि अंग्रेजों द्वारा अपने मतलब के लिए लाई गई थी इसका नाम और स्वभाव बदलने का श्रेय सरदार पटेल को ही जाता है। पटेल की सिफारिशों के बाद ये सेवा बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा के रूप में स्थापित हुई।

                                             सरदार पटेल की प्रतिमा बनाती डच कलाकार क्लेरा क्वेन

 

संघ पर प्रतिबंध की वकालत की: पटेल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बिल्कुल खिलाफ थे और वो देश के पहले ऐसे गृहमंत्री रहे होंगे जिन्होनें संघ पर प्रतिबंध की वकालत की थी। पटेल कई बार प्रेस के सामने ये बात कर चुके थे कि संघ जैसे संगठन देश की एकता अखंडता के लिए सांप्रदायिक जहर के बराबर है।

565 रियासतों को जोड़कर एक किया: हमने आजाद भारत का सपना तो देखा था मगर भारत को भारत बनाना इतना आसान नहीं था। मगर आज हमारा देश जो पूर्ण स्वराज्य बना उसमें सरदार पटेल का अतुलनीय योगदान है। पटेल ने भारत को एक करने के लिए 565 अलग अलग रियासतों के राजाओं को एक होने के लिए मनाया था। सबसे मुश्किल काम हैदराबाद के निजाम और जूनागढ़ के राजा को मनाने का था क्योंकि वो भारत में शामिल होना नहीं चाहते थे मगर पटेल के अथक प्रयासों के कारण ही ये सब मुमकिन हो पाया।

गांधी के देहांत के दो महीने बाद ही हो गया था निधन: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन के दो महीने पश्चात ही सरदार पटेल का निधन हो गया था। पटेल गांधी और उनके आदर्शों को काफी मानते थे और कहा जाता है कि उनकी मौत से उन्हें गहरा सदमा भी पहुंचा था और उसी के बाद से उनकी तबीयत काफी खराब रहने लगी थी।

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