रामनाथ कोविंद: एक साधारण परिवार से उठकर राष्ट्रपति बनने तक का सफर

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भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का 1 अक्टूबर को 74वां जन्मदिन मनाएंगे। कोविंद अत्यंत साधारण दलित परिवार से हैं। वह 20 जुलाई, 2017 को राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित हुए और 25 जुलाई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जे. एस. खेहर ने भारत के राष्ट्रपति के पद की शपथ दिलाई। रामनाथ इससे पूर्व उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में और बिहार के राज्यपाल के पद को सुशोभित कर चुके हैं। वह पेशे से एक वकील रहे हैं।

जीवन परिचय

रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर, 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के परौंख गांव में हुआ। उनके पिता मैकू लाल और माता कलावती थी। कोविंद का संबंध कोरी या कोली दलित जाति है, जो यूपी में एससी जाति के अंतर्गत आती है।

उनकी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद आगे पढ़ाई के लिए उन्हें 8 किमी दूर कानपुर गांव पैदल जाना पड़ता था। यहां उन्होंने बीएनएसडी इंटरमीडिएट कॉलेज में प्रवेश लिया और इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने वाणिज्य में स्नातक की डिग्री और डीएवी कॉलेज (कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध) से एलएलबी की डिग्री हासिल की। रामनाथ की शादी 30 मई, 1974 को सविता कोविंद से हुई। उनके एक बेटा प्रशांत और एक बेटी स्वाति है। उन्होंने परौंख गांव का पैतृक घर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को दान कर दिया।

वकालत में कॅरियर

लॉ की उपाधि हासिल कर लेने के बाद रामनाथ कोविंद ने दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत का अभ्यास किया। कोविंद ने वर्ष 1971 में दिल्ली के बार काउंसिल में नामांकन करवाया। वह वर्ष 1977 से वर्ष 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के वकील रहे थे। वर्ष 1977 और 1978 के बीच, उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सहायक के रूप में भी काम किया। वर्ष 1978 में, वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक वकील-ऑन-रिकॉर्ड बने और वर्ष 1980 से 1993 तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के लिए एक स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। एक वकील के रूप में, उन्होंने नई दिल्ली के फ्री लीगल एड के तहत समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और गरीबों को नि:शुल्क सहायता प्रदान की।

राजनीति सफर

रामनाथ कोविंद वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी शामिल हुए। उन्हें उत्तर प्रदेश से अप्रैल, 1994 में राज्यसभा सदस्य नियुक्त किया गया। उनके इस पद पर सेवा को देखते हुए उन्हें दूसरी बार भी राज्यसभा सदस्य चुना गया। इस प्रकार राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल 12 वर्ष यानी वर्ष 2006 तक का रहा।

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समाजसेवा में सक्रिय रहने वाले कोविंद भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रहे हैं। सदस्य के रूप में उन्होंने सांसद निधि से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विद्यालयों के भवनों का निर्माण कराया और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में योगदान दिया। इस दौरान उन्हें थाईंलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के दौरे पर भी गए।

वर्ष 2017 बने भारत के 14वें राष्ट्रपति

रामनाथ कोविंद ने 14वें राष्ट्रपति के पद के लिए अपना नामांकन किया और उन्होंने बिहार के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 20 जुलाई, 2017 को राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया। उनके खिलाफ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को विपक्ष ने अपना उम्मीदवार चुना था। कोविंद को वैध मतों का 65.65% प्राप्त हुआ और वह राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

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