जब 13 साल की उम्र में रॉबर्ट को दिल दे बैठी थी प्रियंका गांधी, कुछ ऐसी थी पहली मुलाकात

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा 12 जनवरी को अपना 48वां जन्मदिन मनाएगी। उनका जन्म वर्ष 1972 में नई दिल्ली में राजीव गांधी और सोनिया गांधी के घर में हुआ। वे भारत के प्रमुख राजनीतिक नेहरू-गांधी परिवार से आती हैं। प्रियंका भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पोती हैं। उनकी की लव स्टोरी काफी दिलचस्प रही है। ऐसे में प्रियंका गांधी के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें..

13 साल की उम्र में हो गया था रॉबर्ट वाड्रा से प्यार

दिलचस्प बात यह है कि गांधी परिवार में लव मैरिज करने की पुरानी परंपरा रही है, उसी को आगे बढ़ाते हुए प्रियंका गांधी ने भी लव मैरिज को ही चुना। दिल्ली के बिजनेसमैन परिवार से ताल्लुक रखने वाले रॉबर्ट वाड्रा से प्रियंका को महज 13 साल की उम्र में ही प्यार हो गया। रॉबर्ट और प्रियंका एक ही स्कूल में साथ पढ़ते थे। शुरूआत दोस्ती से हुई जो आगे चलकर प्यार के मुकाम तक पहुंची।

थोड़ा रॉबर्ट वाड्रा के बारे में भी जान लेना चाहिए..

रॉबर्ट का जन्म 18 अप्रैल 1969 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ। राजनीतिक पृष्ठभूमि से दूर-दूर तक नाता नहीं रखने वाले रॉबर्ट वाड्रा के परिवार का पीतल और आर्टिफिशल ज्वैलरी का बिजनेस था और परिवार वैसे तो पाकिस्तान के सियालकोट से है, लेकिन भारत विभाजन के दौरान यहां आकर बन गए।

रॉबर्ट ने किया था शादी के लिए प्रपोज

जब दोनों के बीच आपसी समझ अच्छी हो गई तो रॉबर्ट और प्रियंका गांधी एक दूसरे से काफी मिलने लगे। हालांकि उनकी प्रेम कहानी को लेकर चर्चाओं का दौऱ अभी शांत था। लेकिन फिर एक दिन खुद रॉबर्ट वाड्रा ने प्रियंका गांधी के सामने सीधे ही शादी करोगी वाला सवाल पूछा और फिर क्या था प्रियंका ने तुरंत हामी भर दी। फिर 18 फरवरी 1997 में दोनों ने मां सोनिया गांधी के घर दस जनपथ पर सात फेरे लिए। प्रियंका और रॉबर्ट के दो बच्चे हैं-मिराया वाड्रा और रेहान वाड्रा।

रॉबर्ट की सादगी प्रियंका के दिल में उतर गई

रॉबर्ट शुरूआत से किसी अमीर से ताल्लुक नहीं रखते थे और ना ही उनके कोई राजनीतिक कनेक्शन थे, पर हां प्रियंका का दिल रॉबर्ट की सादगी ने जीत लिय़ा। प्रियंका गांधी अक्सर कहती भी हैं कि “जब मैं रॉबर्ट से पहली बार मिली तो उन्होंने मुझे अलग तरह से ट्रीट नहीं किया जो मुझे बेहद अच्छा लगा। आपस में यही समझ आज भी हर समय दोनों को एक-दूसरे के साथ खड़ा रखती है।

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