किसानों के बैनर तले राजनीति की रोटी पके!

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किसान समस्याओं का जिन्न लोकसभा चुनावों से ठीक पहले एक बार फिर बोतल से निकलकर बाहर आ गया है। देशभर से किसान किसी न किसी तथाकथित किसान समर्थक पार्टियों का बैनर लिए दिल्ली पहुंचे इस उम्मीद में कि उनकी मांगे उनका हक उन्हें इस बार ये दल दिलाकर ही रहेंगे। देश में किसानों की हालत अब खराब हुई है या पहले से खराब है सवाल ये नहीं होना चाहिए, बल्कि इन पार्टियों के आहृवान पर दिल्ली पहुंचे इन किसानों को तुरंत ही इन पार्टियों से पूछ लेना चाहिए कि वो सरकार में आने के बाद उनका हक दिलाने में कितने कटिबद्ध होंगे। देश का किसान कभी अपनी मांगो के लिए स्वयं एकजुट नहीं हो पाया और उसे हमेशा विपक्ष द्वारा ही एकजुट किया जाता रहा है। दिल्ली में देखे जा रहे नजारे को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि सत्ता से बाहर छोटे बड़े दल फिर किसानों के बैनर तले अपने लिए माहौल तैयार करने में लग गए हैं। जिन किसानों की अवहेलना पहले से ही होती आ रही है उनकी आवभगत करने में अब कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

नीतियां और कानून बनते बनते तो  अरसा बीत जाता है और  हर 5 साल में  फिर किसान सड़कों पर उतर आता है, अब जरूरी है कि ये क्रम यहीं समाप्त हो

किसानों की प्रमुख मांग है कि उनके लिए अब सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में एक विशेष सत्र का आयोजन करे जहां सरकार अपनी इच्छाशक्ति को जाहिर कर ही दे कि वो उनके लिए ऋणमुक्ति और फसलों की उचित मूल्य की गारंटी वाला कानून बनाएगी। सरकार जब किसानों को जवाब देने आएगी तो मसला कुछ हद तक हल हो सकता है और फिर इस बात का भी सही उत्तर उन्हें मिल ही जाएगा कि यदि सरकार किसानों का कर्ज माफ कर देती है तो अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होगा। नीतियां और कानून बनते बनते तो अर्सा बीत जाता है और हर 5 साल में फिर किसान सड़कों पर उतर आता है, अब जरूरी है कि ये क्रम यहीं समाप्त हो। जिन राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने किसानों से जो पूर्ण ऋणमाफी का जो वादा किया है उन्हें वो देश की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कैसे और किस तरह पूरा करेंगे वो भी समझाना चाहिए। सरकार को भी सदियों से कर्ज की जमीं में धंसे किसानों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए ताकि वो थोड़ी राहत की सांस तो ले चले। मोदी सरकार यदि नोटबंदी को तमाम नकारात्मक रिपोर्ट्स के बावजूद उपलब्धि के रूप में गिना सकती है तो एक फैसला वो किसानों पर भी लेकर अपनी कुर्सी को बचा सकती है।

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