जयंती: पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था हमारा तिरंगा, पांच साल हुई थी रिसर्च

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भारत के लिए ​तीन रंग बहुत प्रमुख हैं केसरिया, सफेद और हरा। जब भी ये तीन रंग साथ दिखते हैं तो हर भारतीय में देशभक्ति जाग उठती है। हम बात कर रहे हैं हमारे तिरंगे की, यानी हमारे राष्ट्रध्वज की। देश का यह झंडा पूरी दुनिया में भारत को एक अलग पहचान देता है। लेकिन क्या आपको पता है कि तिरंगे का यह डिजाइन कैसे बना था और किसने इसे डिजाइन किया था। पिंगली वेंकैया नाम के शख्स ने तिरंगे का डिजाइन तैयार किया था। आज 2 अगस्त को उनकी 144वीं जयंती है। ऐसे में जानते हैं उनके बारे में कुछ ख़ास बातें..

19 साल की उम्र में ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हो गए थे पिंगली

पिंगली वेंकैया का जन्म 2अगस्तए 1876 को आंध्र प्रदेश में मचिलीपट्टनम के एक छोटे से गांव में हुआ था। 19 साल की उम्र में पिंगली वेंकैया ब्रिटिश आर्मी में शामिल हो गए थे लेकिन भारत के प्रति काफी लगाव था। दक्षिण अफ्रीका में पिंगली वेंकैया की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। गांधीजी की बातों से वे काफी प्रभावित थे। उन पर गांधी का इतना असर हुआ कि उन्होंने स्वदेश लौटने का मन बना लिया। भारत आकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। गांधी चाहते थे कि हमारे पास एक ऐसा झंडा हो जो प्रतीकात्मक रूप से सभी से जुड़ा हुआ हो।

ऐसे में पिंगली वेंकैया ने यह जिम्मेदारी ली। उन्होंने 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वज की स्टडी कीं पिंगली वेंकैया ने 1916 से 1921 झंडा बनाने के लिए रिचर्स की। पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने तिरंगे का डिजाइन बनाया। सदभावना को ध्यान में रखते हुए उस वक्त तिरंगे में लाल रंग रखा गया, जो हिंदुओं के लिए था। हरा रंग मुस्लिम धर्म के प्रतीक के तौर पर रखा गया और सफेद बाकी धर्मों के प्रतीक के तौर पर। बीच में चरखे को जगह दी गई थी। गांधी को यह तिरंगे का यह डिजाइन काफी पसंद आया।

वेंकैया के तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित करने की हुई सिफारिश

1921 में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में पिंगली वेंकैया के डिजाइन किए तिरंगे को भारतीय कांग्रेस के झंडे के तौर पर मंजूरी दे दी। इसके बाद 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। देश की आजादी की घोषणा से कुछ दिन पहले फिर कांग्रेस के सामने ये प्रश्न आ खड़ा हुआ कि अब राष्ट्रीय ध्वज को क्या रूप दिया जाए, इसके लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई और तीन सप्ताह बाद 14 अगस्त को इस कमेटी ने अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को यानी वेंकैया के बनाए तिरंगे को ही राष्ट्रीय ध्वज के रूप में घोषित करने की सिफारिश की।

डिजाइन में कुछ संशोधन करते हुए लाल रंग की जगह केसरिया को स्थान दिया गया। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में इसे राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर अपनाया गया। इसके कुछ समय बाद फिर संशोधन हुआ और चरखे की जगह अशोक चक्र को स्थान दिया गया। बताया जाता है कि चरखे को हटाने से गांधी नाराज भी हुए थे। 15 अगस्त 1947 को तिरंगा हमारी आजादी और हमारे देश की आजादी का प्रतीक बन गया।

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तिरंगे में केसरिया–समृद्धि, सफेद– शांति और हरा- प्रगति को दर्शाता है। तिरंगा देने वाले पिंगली वेंकैया की मौत बहुत गरीबी में हुई। 1963 में वेंकैया का निधन एक झोपड़ी में हो गया। पिंगली के काम को लोगों ने भुला दिया। 2009 में पहली बार पिंगली वेंकैया के नाम पर डाक टिकट जारी हुआ। उसके बाद लोगों को पता चला कि वो पिंगली ही थे, जिन्होंने हमें हमारा तिरंगा दिया। मौत के 46 साल बाद उन्हें देश ने सम्मान दिया था।

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