पंडित जवाहर लाल नेहरू: देश के पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के निर्माता

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और देश के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू की  14 नवंबर को जयंती है। देश की आजादी में उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कई आंदोलनों के दौरान उन्होंने लाठियां खाई और जेल भी गये थे। आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्हें बच्चे प्यार से ‘चाचा नेहरू’ के नाम से पुकारते हैं।

जीवन परिचय

पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरू और माता स्वरूप रानी थे, जवाहर उनका सबसे बड़ा बेटा था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा के लिए घर पर ही निजी शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। उनको अंग्रेजी, हिन्दी और संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान था। वे वर्ष 1905 में पंद्रह साल की उम्र में इंग्लैंड चले गए थे। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई पूरी की।

जवाहर लाल नेहरू का विवाह वर्ष 1916 में कमला नेहरू से हुआ था। एक साल बाद उनके घर एक बेटी को जन्म हुआ, जिसका नाम इंदिरा प्रियदर्शनी रखा गया।

वह सन् 1912 में भारत लौटे और देश को आजाद करने के लिए राजनीति से जुड़ गए। वे अपने छात्र जीवन के दौरान विदेशी हुकूमत के अधीन देशों के स्वतंत्रता संघर्ष में रुचि रखते थे। उन्होंने आयरलैंड में हुए सिनफेन आंदोलन में गहरी रुचि ली थी।

सन् 1912 में उन्होंने एक प्रतिनिधि के रूप में बांकीपुर सम्मेलन में भाग लिया एवं 1919 में इलाहाबाद के होम रूल लीग के सचिव बने। नेहरू की महात्मा गांधी से पहली बार मुलाकात 1916 में हुई। वे गांधीज के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने 1920 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहले किसान मार्च का आयोजन किया। देश में पहली बार बड़े स्तर पर हुए 1920-22 के असहयोग आंदोलन में जवाहर लाल ने भी भाग लिया और इस दौरान उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा।

पंडित नेहरू सितंबर 1923 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। उन्होंने 1926 में इटली, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड, बेल्जियम, जर्मनी एवं रूस का दौरा किया। बेल्जियम में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में ब्रसल्स में कमजोर देशों के सम्मेलन में भाग लिया।

उन्होंने वर्ष 1927 में रूस के मास्को का दौरा किया और अक्टूबर में समाजवादी क्रांति की दसवीं वर्षगांठ समारोह में भाग लिया। वर्ष 1926 में मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस को आजादी के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध करने में नेहरू की एक महत्वपूर्ण भूमिका थी।

सन् 1928 में साइमन कमीशन के भारत आने पर उसके विरोध के दौरान उन्होंने लखनऊ में एक जुलूस का नेतृत्व किया, जहां उन पर लाठी चार्ज किया गया था।

जवाहर ने 29 अगस्त 1928 को सर्वदलीय सम्मेलन में भाग लिया और भारतीय संवैधानिक सुधार पर बनी नेहरू रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किये थे। इस रिपोर्ट का नाम उनके पिता श्री मोतीलाल नेहरू के नाम पर रखा गया था। उसी वर्ष उन्होंने ‘भारतीय स्वतंत्रता लीग’ की स्थापना की एवं इसके महासचिव बने। इस लीग का मूल उद्देश्य भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से पूर्णतः मुक्त करना था।

वर्ष 1929 में लाहौर में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन में पंडित नेहरू को अध्यक्ष चुना गया। इस अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य देश को पूर्ण स्वतंत्रता दिलाने का रखा गया। 26 जनवरी,1930 को पहली बार भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

उन्हें 1930-35 के दौरान नमक सत्याग्रह एवं कांग्रेस के अन्य आंदोलनों के कारण कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने 14 फ़रवरी 1935 को अल्मोड़ा जेल में अपनी ‘आत्मकथा’ का लेखन कार्य पूर्ण किया। रिहाई के बाद वे अपनी बीमार पत्नी को देखने के लिए स्विट्जरलैंड गए एवं उन्होंने फरवरी-मार्च, 1936 में लंदन का दौरा किया।

जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया तो ब्रिटिश सरकार ने बिना भारतीयों की अनुमति के भारत को भी युद्ध में झोंक दिया। इस पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसका विरोध किया। इस दौरान ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह’ आंदोलन शुरू किया गया। इस आंदोलन में जवाहर लाल नेहरू द्वितीय सत्याग्रही बने, जिसके कारण 31 अक्टूबर 1940 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दिसंबर 1941 में अन्य नेताओं के साथ जेल से मुक्त कर दिया गया।

7 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में हुई अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में जवाहर लाल ने ऐतिहासिक संकल्प ‘भारत छोड़ो’ को कार्यान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया। 8 अगस्त 1942 को उन्हें अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर अहमदनगर किले में कैद कर रखा गया। अपने पूर्ण जीवन में वे नौ बार जेल गए। जनवरी 1945 को ब्रिटिश सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया जिसके बाद उन्होंने राजद्रोह का आरोप झेल रहे, आईएनए के अधिकारियों एवं सैनिकों का कानूनी बचाव किया।

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प्रधानमंत्री के रूप में पंडित नेहरू

जब भारत 1947 में आजाद हुआ, पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक भारत के प्रधानमंत्री पद बने रहे। पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है, उन्होंने ही पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया था। पंडित नेहरू को 1955 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

पंडित जवाहर लाल एक अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी, जिनमें प्रमुख पुस्तकें ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ और ‘ग्लिम्प्सेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री’ हैं।

निधन
देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ाने से मृत्यु हो गई।

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