नंदा दामोदर: 10 साल की उम्र में एक्टिंग, 53 में सगाई कुछ इस तरह रही इस अभिनेत्री की लाइफ…

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बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नंदा अपने दिलकश अदाओं और बेहतरीन अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा की एक बेहतरीन अदाकारा के रुप में याद की जाती हैं। नंदा का जन्म 8 जनवरी, 1938 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। 25 मार्च, 2014 को दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हो गया था। आपको जानकर हैरानी होगी मगर नंदा कभी फिल्मों में काम करना नहीं चाहती थी। जन्मदिन के इस खास मौके पर चलिए जानते हैं उनकी जिदंगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।

नन्दा का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था। उनके पिता विनायक दामोदर मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता और निर्देशक थे। जो अपने दौर में मास्टर विनायक नाम से खासे मशहूर थे। जब नन्दा 5 साल की थी तब अपने पिता के कहने पर उनकी एक फिल्म में काम करने के लिए अनमने मन से तैयार हुई मगर फिल्म पूरी होने से पहले ही नन्दा के पिता चल बसे। परिवार आर्थिक संकट से घिर गया। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदार नन्दा के मासूम कंधो पर आ गई। यही वजह थी कि ना चाहते हुए भी नन्दा को फिल्मों की ओर रुख करना पड़ा।

फिल्मी सफर की शुरुआत

नन्दा महज 10 साल की थी जब उन्होंने फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करना किया था। नन्दा ने अपने सिने सफर की शुरुआत मराठी सिनेमा से की। उनकी पहली फिल्म दिनकर पाटिल के निर्देशन में बनी फिल्म  ‘कुलदेवता’ थी जिसमें बेहतरीन अदायगी के लिए उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुरस्कृत भी किया। बॉलीवुड में उन्होंने बतौर अभिनेत्री  1957 में अपने चाचा वी शांता राम की फिल्म ‘तूफान और दिया’ से कदम रखा।

बॉलीवुड में कुछ ऐसा रहा नन्दा का सफर

साल 1959 में उनकी फिल्म छोटी बहन रिलीज हुई। इस फिल्म के जरिये नन्दा दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहीं। इसी साल उनकी फिल्म धूल का फूल रिलीज हुई जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट रही। यह फिल्म उनके बॉलीवुड कॅरियर में टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई। बस फिर क्या था इसके बाद नन्दा ने कभी पिछे मुड़कर नहीं देखा।

बेहतरीन फिल्में 

काला बाजार  ‘चार दीवारी’  ‘मेंहदी लगी मेरे हाथ’ जै‘जब जब फूल खिले’  ‘असलियत’ (1974), ‘जुर्म और सजा’ (1974) और ‘प्रयाश्चित’ (1977) जैसी फिल्में कीं है। फिल्म इंडस्ट्री में नन्दा को मासूमियत, प्यारी सी लड़की की छवि में ही देखना पसंद करते थे। यही वजह थी की जब जब वे लीक से हटी दर्शकों ने उनकी फिल्मों को नापसंद किया।

हमेशा सच्चे प्यार को तरसती रही नन्दा

नन्दा अपने सिने कॅरियर और अपनी पारिवारिक जिम्मदारियों में इतनी उलझ गई थी कि वे अपने ऊपर कभी ध्यान ही नहीं दे पाईं। नन्दा शर्मिले स्वभाव की थी मगर कॅरियर के दौरान वे निर्देशक मनमोहन देसाई को दिल दे बैठी। दोनों के दिलों में एक दुसरे के लिए मोहब्बत तो थी मगर कभी जाहिर नहीं की। कुछ समय बाद मनमोहन ने सगाई कर ली और नन्दा अकेली रह गई। कुछ समय बाद ही मनमोहन की पत्नी का निधन हो गया जिसके बाद मनमोहन ने नन्दा के सामने प्यार का इजहार किया और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। साल 1992 में दोनों ने सगाई कर ली। उस वक्त नन्दा 53 साल की थी। मगर सगाई के कुछ दिनों बाद ही मनमोहन की एक हादसे में मौत हो गई।

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