राजस्थान : टिकट बंटवारे में वंशवाद फिर हावी, नेताओं के बेटे-बहूओं की लगी लॉटरी

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राजस्थान विधानसभा चुनावों के बीच टिकटों की लंबी माथापच्ची के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। आलाकमान ने टिकटों के बंटवारे में जहां कई दिग्गजों पर फिर से भरोसा दिखाया है तो वहीं नेताओं के परिवार वालों को भी काफी तरजीह दी गई है।

नामांकन शुरू होने से ठीक एक दिन पहले बीजेपी ने अपने 131 उम्मीदवारों चुनावी मैदान में उतार दिया है। गौरतलब है कि राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होगा जिसके बाद 11 दिसंबर को परिणामों की घोषणा होगी।

जैसा कि सूबे में काफी लंबे समय से भाजपा की एंटी लहर चल रही है उसको देखते हुए पार्टी पुराने चेहरों के साथ एक बार फिर मैदान में उतरना चाहती है वहीं आलाकमान की तरफ से महज दो मंत्रियों सहित 23 विधायकों के ही टिकट कटें हैं।

वंशवाद फिर हावी-

चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर हर पार्टी पर वंशवाद के आरोप लगते रहे हैं ऐसे में बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में जहां कुछ मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटे हैं वहीं उनके रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारकर वापस भरोसा दिखाने की कोशिश भी की गई है। पहली लिस्ट में करीब 20 नेताओं के बेटे और रिश्तेदारों को मौका दिया गया है।

नेता के परिवार से होने का इन्हें मिला फायदा-

सादुलशहर- गुरबीर सिंह बराड़ (बीजेपी विधायक गुर्जंट सिंह के पोते)

डीग-कुम्हेर- शैलेश सिंह (दिगंबर सिंह के बेटे)

नसीराबाद- रामस्वरूप लांबा (सांवरलाल जाट के बेटे को)

रवायत- पूनम कंवर (देवी सिंह भाटी की पुत्रवधू)

सपोटरा- गोलमा देवी (किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी)

शाहपुरा- कैलाश चंद्र (सुंदर लाल के बेटे)

प्रतापगढ़- हेमंत मीणा (नंदलाल मीणा के बेटे)

मुमडावर- मनजीत चौधरी (धर्मपाल चौधरी के बेटे)

बामनवास- राजेंद्र मीणा (कुंजी लाल मीणा के बेटे)

सादुलपुर- राम सिंह कस्वां (कमला कस्वां के पति)

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