पाठक है तो खबर है। बिना आपके हम कुछ नहीं। आप हमारी खबरों से यूं ही जुड़े रहें और हमें प्रोत्साहित करते रहें। आज 10 हजार लोग हमसें जुड़ चुके हैं। मंजिल अभी आगे है, पाठकों को चलता पुर्जा टीम की ओर से कोटि-कोटि धन्यवाद।

आखिर क्यों कारतूस पर लगी चर्बी से भड़के थे मंगल पांडे और बजाया था स्वतंत्रता का बिगुल

3 read

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे जिन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का आगाज किया। उनके द्वारा भड़काई गई इस क्रांति की ज्वाला से अंग्रेजी हुकूमत की जड़े एक बार के लिए हिल गई थीं। आज 19 जुलाई को मंगल पांडे की 192वीं जयंती है। उन्होंने चर्बी लगे कारतूसों के इस्तेमाल करने से मना कर दिया और अपने धर्म व देश की रक्षा के लिए जीवन का बलिदान कर दिया।

हालांकि बाद में अंग्रेजों ने 1857 के विद्रोह को दबा दिया, पर मंगल पांडे की शहादत ने देश में लोगों के बीच जो क्रांति के बीज बोए, उसके बाद भारत से अंग्रेजी शासन को बाहर करने में 100 साल से कम समय लगा।

मंगल पांडे जीवन परिचय

स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम अभय रानी था।

मंगल पांडे वर्ष 1849 में ’34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री’ सेना की पैदल टुकड़ी में भर्ती हो गए और वह इसमें 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

विद्रोह का कारण

जब भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था तब वह भारतीय जनता में से ही सैनिकों की भर्ती करती थी। मंगल पांडे 22 वर्ष की उम्र में कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री में एक सिपाही के रूप में भर्ती हो गए थे।

कंपनी की इन सैनिक टुकड़ियों में पहले से ही भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव होते थे। वे उनको हीन भाव से देखते थे और भारतीयों का धर्म भ्रष्ट करने का कोई भी मौका नहीं गवाते थे। ऐसे में सैनिकों में असंतोष था। बैरकपुर में पोस्टिंग के दौरान हुई एक घटना-क्रम ने उनका जीवन बदल दिया था।

ब्रिटिश सरकार ने भारत में नए राइफल लांच की जिसका नामक एनफील्ड राइफल था। इसका उपयोग भारतीय सैनिकों को करना था। इस राइफल में प्रयुक्त कारतूसों के मुंह पर गाय और सूअर की चर्बी लगी होती थी और हिन्दू-मुसलमान सैनिक इनके उपयोग करने को अपने धर्म के विरूद्ध मानते थे।

इन कारतूस के उपयोग से हिन्दू-मुस्लिम सैनिकों में आक्रोश फैलने लगा। क्योंकि राइफल का उपयोग करते समय सैनिकों को पहले कारतूस पर लगे चर्बी को मुंह से छीलकर हटाना पड़ता था। इस कारण भारतीय सैनिकों को लगने लगा की अंग्रेज उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मंगल पांडे भी उनमें से एक था इससे वे क्रोधित हुए और उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की सोची।

अंग्रेज अधिकारी मेजर ह्यूसन को मौत के घाट उतारा

इन कारतूसों के उपयोग से भारतीयों के धार्मिक हितों को ठेस पहुंच रही थी ऐसे में 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारियों के आदेश मानने से इनकार कर दिया। वे परेड ग्राउंड से रेजिमेंट गार्ड रूम पर पहुंचे और अन्य सैनिकों को भी विद्रोह के लिए उकसाने लगे।

उनकी राइफल छीनने के लिये आगे बढे अंग्रेज अफसर मेजर ह्यूसन को मौत के घाट उतार दिया।

इसके बाद पांडे ने एक और अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेन्ट बॉघ को मौत के घाट उतार दिया। आखिर में मंगल पांडे को अंग्रेज सिपाहियों ने पकड़ लिया।

इस प्रकार चर्बी लगे कारतूस का प्रयोग ईस्ट इंडिया कंपनी शासन के लिए घातक सिद्ध हुआ और मंगल पांडे ने बैरकपुर छावनी में 29 मार्च 1857 को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा दिया।

‘मारो फिरंगी को’ का नारा दिया

मंगल पांडे ने अंग्रेजों के विरूद्ध पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘मारो फिरंगी को’ का नारा दिया। उस समय देश में अंग्रेजों को फिरंगी के नाम से पुकारा जाता था।

मंगल पांडे को निर्धारित दिन से पहले दी गई फांसी

बाद में मंगल पांडे पर कोर्ट मार्शल द्वारा मुकदमा चलाकर 6 अप्रैल 1857 को फांसी की सजा सुना दी गयी। फैसले के अनुसार उन्हें 18 अप्रैल 1857 को फांसी दी जानी थी, पर ब्रिटिश सरकार ने मंगल पांडे को निर्धारित तिथि से दस दिन पूर्व ही 8 अप्रैल सन 1857 को फांसी दे दी।

 

COMMENT

Chaltapurza.com, एक ऐसा न्यूज़ पोर्टल जो सबसे पहले, सबसे सटीक की भागमभाग के बीच कुछ अलग पढ़ने का चस्का रखने वालों का पूरा खयाल रखता है। हम देश-विदेश से लेकर राजनीतिक हलचल, कारोबार से लेकर हर खेल तो लाइफस्टाइल, सेहत, रिश्ते, रोचक इतिहास, टेक ज्ञान की सभी हटके खबरों पर पैनी नजर रखने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही आपसे जुड़ी हर बात पर हमारी “चलता ओपिनियन” है तो जिंदगी की कशमकश को समझने के लिए ‘लव यू जिंदगी’ भी कुछ अलग है। हमारी टीम का उद्देश्य आप तक अच्छी और सही खबरें पहुंचाना है। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे इस प्रयास को निरंतर आप लोगों का प्यार मिल रहा है…।

Copyright © 2018 Chalta Purza, All rights Reserved.