जयंती: अपनी ज़िंदगी में तीन चीजों से बेहद लगाव रखते थे खुशवंत सिंह

Views : 6348  |  3 minutes read
Khushwant-Singh

वो अपने अंतिम दिनों में कहा करते थे कि जिस्म बूढ़ा हो चुका है लेकिन आंखों में बदमाशी आज भी मौजूद है। ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ और ‘द कंपनी ऑफ वूमन’ जैसी बेस्टसेलर किताबें लिखने वाले जाने-माने लेखक, कवि और स्तंभकार खुशवंत सिंह जिनकी रचनाओं ने कितने ही लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, जिनकी रचनाएं आज भी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है। 02 फरवरी को खुशवंत सिंह की 107वीं जयंती के मौके पर आपको रूबरू करवाते हैं इस शख्सियत की जिंदगी के कुछ पहलुओं से..

Khushwant-Singh-Writer

खुद को मानते थे अय्याश किस्म का इंसान

80 से अधिक किताबें लिखने वाले खुशवंत सिंह का जन्म 2 फरवरी, 1915 को हुआ था। वहीं खुशवंत सिंह अपनी जिंदगी में तीन चीजों से बेहद लगाव रखते थे। सबसे पहले उन्हें दिल्ली से प्यार था, इसके बाद वो ‘लेखन’ और तीसरा उन्हें खूबसूरत महिलाओं से बेहद लगाव था। खुद को दिल्ली का सबसे यारबाज और दिलफेंक बूढ़ा कहने वाले खुशवंत सिंह ने आखिरी सांस तक लिखना जारी रखा। यहां तक कि वो 99 साल की उम्र में भी सुबह जल्दी 4 बजे उठकर लिखा करते थे।

अपनी किताब में खुशवंत ने अपनी जिंदगी के शुरूआती सालों के बारे में काफी विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वो अपनी जिंदगी के कई साल अय्याशी में डूबे रहे। उन्हें कभी भी भारतीय सिद्धांत रास नहीं आए। यहां तक कि वो महिलाओं को कभी सम्मान की नजर से नहीं देख पाते थे।

सिर्फ 4 साल तक की विदेश सेवा की नौकरी

अपने करियर की शुरूआत खुशवंत सिंह ने वकील के तौर पर की। वकालत करते-करते विदेश सेवा की तैयारियों में जुट गए। आखिरकार 1947 में उनका चयन हुआ। स्वतंत्र भारत में सरकार के इंफॉरमेशन ऑफिसर के पद पर उन्होंने टोरंटो और कनाडा में 4 साल तक काम किया। हालांकि अपनी किताबों में वो आगे हमेशा कहते रहे कि उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल पढ़ाई और वकालत में बर्बाद किए जो कि उन्हें कभी पसंद नहीं थे।

Khushwant-Singh-and-Dr-Kalam

एक बार राज्यसभा सांसद रहे, कई सम्मानों से नवाज़े गए

घर में बचपन से राजनीतिक माहौल देखकर खुशवंत सिंह का नाता राजनीति से भी जुड़ा ही रहा। इनके चाचा सरदार उज्जवल सिंह पंजाब और तमिलनाडु के राज्यपाल पद पर रहे। आखिरकार खुशवंत सिंह भी वर्ष 1980 में राजनीति में उतरे और साल 1986 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में सेवाएं दी।

Read More: सबसे लंबे समय तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे मोहन लाल सुखाड़िया

वर्ष 1974 में सरकार ने उनके काम के सम्मान में उन्हें ‘पद्म भूषण’ से नवाजा जिसे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ‘ब्लू स्टॉर ऑपरेशन’ के विरोध में उन्हें वापस लौटा दिया। वहीं, साल 2007 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ भी दिया गया। 20 मार्च, 2014 को खुशवंत सिंह ने नई दिल्ली में आखिरी सांस ली।

COMMENT