“सीखने की कोई उम्र नहीं होती”, 96 साल की इस दादी ने कर दिया साबित 

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उम्र के सभी बंधनों को चुनौती देते हुए और “सीखने की कोई उम्र नहीं होती” मुहावरे को साकार करने वाली 96 साल की एक महिला ने केरल सरकार द्वारा ली जाने वाली साक्षरता परीक्षा में 100 में से 98% अंक हासिल किए हैं। आलप्पुषा जिले के चेपड की रहने वाली कर्थयायिनी अम्मा परीक्षा देने वाले 43,330 छात्रों में से सबसे अधिक उम्र की भी बन गई है।

बुधवार को जारी साक्षरता परीक्षा परिणाम के मुताबिक कर्थयायिनी अम्मा को गणित में 30 में से 28 अंक, मलयालम में पढ़ने और लिखने के उनको 30 में से 30 अंक मिले। गौरतलब है कि केरल में संख्यात्मक साक्षरता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के ‘अक्षरलाक्षम’ मिशन के हिस्से के रूप में यह परीक्षा हर साल आयोजित की जाती है।

परीक्षा में 98% अंकों के साथ, कर्थयायिनी अम्मा को राज्य सरकार द्वारा ‘साक्षर’ घोषित किया जाएगा और अगले साल वह चौथी क्लास की परीक्षा में बैठने के लिए योग्य मानी गई हैं। तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री पिनाराय विजयन उन्हें योग्यता प्रमाणपत्र देकर सम्मानित करेंगे।

आपको बता दें कि 96 साल की कर्थयायिनी अपनी जिंदगी में कभी भी स्कूल नहीं गई। उन्होंने मंदिरों और आस-पास के घरों में एक स्वीपर के रूप में काम किया। इन दिनों, वह अपनी बेटी के साथ रहती है।

परिणाम देखकर क्या कहा कर्थयायिनी अम्मा ने-

परिमाम देखकर कर्थयायिनी ने खुशी और अफसोस दोनों जताए। उनका कहना था कि मुझे खुशी है  कि इस परीक्षा में मुझे अच्छे नंबर मिले लेकिन 2 नंबर कटने का अफसोस भी रह गया। इसके अलावा उनका कहना था कि वो अब आगे और लिखना, पढ़ना चाहती है। वह अंग्रेजी भी सीखना चाहती है।

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