पुण्यतिथि खास: उर्दू की गलतियों पर बड़े बड़ों से पंगा ले लेते थे प्रसिद्ध शायर ‘जोश’

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20वीं शताब्दी में जोश मलीहाबादी एक ऐसे शायर के रूप में उभर कर सामने आए जिन्होंने आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ अपनी कलम उठाई। साहित्य की दुनिया में उन्हें उनकी बगावत पसंद नज्मों के लिए जाना जाता था। क्रांति और इंकलाब की बात करने वालों ने जोश को उस दौर में क्रांति का शायर और शायरे इन्कलाब की उपाधि दी। प्रसिद्ध उर्दू शायर मलीहाबादी का जन्म 5 दिसंबर 1898 में मलीहाबाद में हुआ था और निधन 22 फरवरी को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में। जोश की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी कुछ चुनिंदा रचनाएं…

1.”हद है अपनी तरफ़ नहीं मैं भी
और उन की तरफ़ ख़ुदाई है”

2.”मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है”

3.”दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया”

4.”एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के
एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है”

5.”इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है
जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है”

6.”मुझ को तो होश नहीं तुम को ख़बर हो शायद
लोग कहते हैं कि तुम ने मुझे बर्बाद किया”

7.”कश्ती-ए-मय को हुक्म-ए-रवानी भी भेज दो
जब आग भेज दी है तो पानी भी भेज दो”

8.”उस ने वादा किया है आने का
रंग देखो ग़रीब ख़ाने का”

9.”वहाँ से है मिरी हिम्मत की इब्तिदा वल्लाह
जो इंतिहा है तिरे सब्र आज़माने की”

10.”सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का
जब उस ने वादा किया हम ने ए’तिबार किया”

11.”कोई आया तिरी झलक देखी
कोई बोला सुनी तिरी आवाज़”

12.”किसी का अहद-ए-जवानी में पारसा होना
क़सम ख़ुदा की ये तौहीन है जवानी की”

13.”आप से हम को रंज ही कैसा
मुस्कुरा दीजिए सफ़ाई से”

14.”अब तक न ख़बर थी मुझे उजड़े हुए घर की
वो आए तो घर बे-सर-ओ-सामाँ नज़र आया”

15.”तुझको इन नींद की तरसी हुई आंखों की कसम
अपनी रातों को मेरी हिज्र में बरबाद न कर”

 

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