बर्थडे: प्रेम चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा में विलेन के किरदार को दी नई पहचान

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Prem-Chopra-Biography

साल 1973 में रिलीज़ हुई बॉ​लीवुड फिल्म ‘बॉबी’ के फेमस डायलॉग ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ ने रातों-रात अभिनेता प्रेम चोपड़ा को खलनायकी की दुनिया का बादशाह बना दिया था। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई खलनायक हुए हैं, जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर दर्शकों के दिलों में ख़ास जगह बनाईं। इन्हीं में से एक हैं प्रेम चोपड़ा। प्रेम आज अपना 85वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 23 सितम्बर, 1935 को बंटवारे से पहले के भारत में लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता का नाम रणबीर लाल चोपड़ा और माता का नाम रूपरानी चोपड़ा था। प्रेम चोपड़ा के पिता सरकारी कर्मचारी थे।

प्रेम की स्कूली शिक्षा शिमला और कॉलेज की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय में हुई। पढ़ाई के दौरान ही उनका थियेटर की ओर रुझान हो गया था। कॉलेज के दौरान वे कई नाटकों का हिस्सा रहे थे। अपने अभिनय के सपने को पूरा करने के लिए प्रेम पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई चले गए। ऐसे में प्रेम चोपड़ा के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें..

फिल्म ‘मुड़ मुड़ के ना देख’ से शुरू हुआ था कॅरियर

प्रेम चोपड़ा ने वर्ष 1960 में रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्म ‘मुड़ मुड़ के ना देख’ से अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई। इसके तुरंत बाद ही प्रेम ने अपना रुख पंजाबी फिल्मों की ओर कर लिया। इस दौरान उन्हें पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ में काम करने का मौका मिला। वर्ष 1960 में ही रिलीज़ हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म से प्रेम एक हद तक पंजाबी दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए थे।

इन फिल्मों ने बनाया प्रेम को बॉलीवुड का ‘विलेन’

हिंदी सिनेमा में प्रेम चोपड़ा को फेमस खलनायकों में से एक माना जाता है। उनकी बेहतरीन फिल्मों में वर्ष 1964 में रिलीज हुई फ़िल्म ‘वो कौन थी’, वर्ष 1965 में फिल्म ‘शहीद’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘मेरा साया’, ‘उपकार’, ‘जय जवान- जय किसान’, ‘अराउंड द वर्ल्ड’, ‘झुक गया आसमान’, ‘डोली’, ‘दो रास्ते’, ‘पूरब और पश्चिम’ और ‘हरे रामा-हरे कृष्णा’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं, जिनके लिए प्रेम को हमेशा याद किया जाएगा। चार दशक लंबे सिने करियर में प्रेम चोपड़ा ने लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया।

राजकपूर की पत्नी कृष्णा की बहन उमा से हुई शादी

प्रेम चोपड़ा की शादी वर्ष 1969 में राजकपूर की पत्नी कृष्णा की बहन उमा से हुई। राजकपूर की बहन उमा का रिश्ता प्रेम के पास जाने-माने लेखक और निर्देशक लेख टंडन लेकर आए थे। प्रेम और उमा की तीन बेटियां रंकिता, पुनीता और प्रेरणा हैं। इन दोनों की तीनों बेटियां ही फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं।

प्रेम चोपड़ा के लोगों के बीच फेमस हुए डायलॉग्स

बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध खलनायक-अभिनेता प्रेम चोपड़ा के कई डायलॉग्स फेमस हुए। उनमें फिल्म ‘सौतन’ का ‘मैं वो बला हूं जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं।’ फिल्म ‘आग का गोला’ से ‘शराफत और ईमानदारी का सर्टिफिकेट ये दुनिया र्सिफ उन्हें देती है, जिनके पास दौलत होती है।’ फिल्म ‘अलीबाबा चालीस चोर’ से ‘बादशाहों का अंदाजा बहुत कम गलत होता है और जब गलत होता है तो वो बादशाह नहीं रहते।’

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फिल्म ‘खिलाड़ी’ से ‘राजनीति की भैंस के लिए दौलत की लाठी की जरूरत होती है।’ फिल्म ‘सौतन’ से एक और डायलॉग ‘जिनके घर शीशे के होते हैं वो बत्ती बुझा कर कपड़े बदलते हैं।’ फिल्म ‘वारिस’ का ‘सांप के फन उठाने के पहले उसे कुचलना मैं अच्छी तरह जानता हूं।’ इनके अलावा फिल्म ‘क्षत्रिय’ में प्रेम चोपड़ा का तकिया कलाम ‘मीठा बोल बड़ा अनमोल।’ आदि शामिल हैं।

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