सीबीआई : देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की हम और कितनी फजीहत देखेंगे ?

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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई एक बार फिर हर किसी की जुबां पर है। इस बार सीबीआई का नाम उसकी अंदर की कलह के कारण देश और विदेश के मीडिया में उछल रहा है। सीबीआई के नंबर 1 और 2 के अधिकारियों पर इस बार गाज गिरी तो पूरे देश में घमासान मच गया। सीबीआई का नाम उछलना कोई नई बात नहीं है, किसी ना किसी वजह से सीबीआई चर्चा में रहती ही है।

सरकारी कंट्रोल के आरोपों को झेलने वाली सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ समय पहले पिंजरे में बंद तोता कहकर संबोधित किया था। ऐसे में सीबीआई की साख हर दूसरे दिन गिरती जा रही है। वहीं देश में कुछ ऐसे अहम मामले हैं जो सीबीआई के दामन पर दाग ही तरह आज भी लगे हुए हैं।

आरुषि-हेमराज मर्डर केस में हुई सबसे ज्यादा फजीहत-

नोएडा में आज से तकरीबन 10 साल पहले आरुषि तलवार और उनके नौकर हेमराज का मर्डर हुआ। मामले की पुलिस जांच से कुछ हाथ ना लगने के बाद करीब दो हफ्ते बाद सीबीआई एक्शन में आई।

जांच चलती रही, दिसंबर, 2010 में सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि आरुषि के माता-पिता ही हत्यारे हैं लेकिन उनके पास इसके लिए अभी सबूत नहीं है। सीबीआई अदालत ने राजेश और पत्नी नुपुर को सजा सुना दी। दोनों ने इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की, लंबी अदालती जंग के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 9 साल बाद दोनों को बरी कर दिया।

एक बार फिर सीबीआई की जांच पर सवाल उठे, आखिरकार मामला वहीं आकर लटक गया कि आरूषि और हेमराज का कत्ल किसने किया, जिसका जवाब अभी तक सीबीआई नहीं दे पाई है।

निठारी कांड में दिखाया लचर रूख-

साल 2005-06 में हुए निठारी कांड की तस्वीरें आज भी ताजा है। यह मामला सीबीआई के पास गया, जांच हुई और मुख्य़ आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया गया, वजह वो ही सबूत का ना होना बताई गई। मोनिंदर के नौकर सुरिंदर कोली को हत्यारा घोषित किया गया।

कुछ समय बाद जुलाई, 2017 में मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके नौकर दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।

अमित शाह के ख़िलाफ़ हत्या का केस बंद-

गुजरात में हुए फ़र्ज़ी पुलिस मुड़भेड़ में मामले में कई मुस्लिम युवाओं की जान गई। कुछ समय बाद भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष अमित शाह का नाम सामने आया। सीबीआई जांच शुरू हुई और अमित शाह को अभियुक्त बनाया गया। कुछ महीनों बाद सीबीआई ने अभियुक्तों की लिस्ट में बदलाव किए और अमित शाह का नाम हटा दिया।

इसके बाद विपक्षी दलों ने सीबीआई पर सरकार के दबाव में काम करने के आरोप लगाए।

अब भी अधर में है बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला-

2002 में हुआ देश का सबसे चर्चित मामला बाबरी मस्जिद विध्वंस आज भी कोर्ट की तारीखों में फंसा हुआ है। सरकारें बदली लेकिन सीबीआई की जांच कछुआ चाल से चलती रही पर नतीजा कब और क्या आएगा इसके कयास अभी भी नहीं लगाए जा सकते हैं।

बोफोर्स केस-

1986 के भारत सरकार और स्वीडन के बीच हथियारों की कंपनी बोफोर्स के साथ एक डील हुई। 410 तोपों को खरीदने की योजना थी, लेकिन डील घूसकांड के हत्थे चढ़ गई। कई बड़े नेताओं पर गाज गिरी। डील के बिचौलिए क्वात्रोची को भारत लाने के लिए सीबीआई ने काफी कोशिशें की लेकिन नाकामी हाथ लगी।

सिख दंगों में फिर दिखी लापरवाही-

1984 में सिख दंगों से पूरा देश दहल गया, दंगों के आरोप कांग्रेस के पूर्व नेता जगदीश टाईटलर पर लगे। सीबीआई ने टाईटलर के खिलाफ केस फाइल किया और जांच शुरू की। कुछ समय की जांच के बाद सीबीआई को कोई सबूत नहीं मिले। सीबीआई ने दो गवाह जसबीर सिंह और सुरिंदर सिंह के बयान झूठे लगे।

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