प्रदीप : वो गीतकार जिसके गीतों को सुन आज भी लोगों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं

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‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में फर लो पानी

कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के फिर ना आएं’

जब भी ये गीत हमारे कानों में गूंजता है तो देशप्रेम की भावना से हमारे रौंगटे खड़े हो जाते हैं और इसके पीछे सिर्फ एक ही नाम है हिंदी सिनेमा के राष्ट्रकवि रामचंद्र नारायणजी  द्विवेदी जी, जिन्हें दुनिया कवि प्रदीप के नाम से भी जानती है। जब भी कवि प्रदीप के बारे में बात होती है तो देशप्रेम की भावना से हर कोई सराबोर हो जाता है।

बेबाक शैली के लिए जाने वाले कवि प्रदीप की 11 December को पुण्यतिथि है, आज ही के दिन प्रदीप ने 83 साल की उम्र में आखिरी सांस ली थी।

प्रदीप उज्जैन के बडनगर में ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए जिनकी परवरिश मिडिल क्लास तरीके से ही हुई। शुरूआती पढ़ाई पूरी करने के बाद लखनऊ विश्वविद्धालय में एडमिशन लिया जहां से ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज के दिनों से ही हिंदी के प्रति लगाव प्रदीप में देखा जा सकता था। वे शुरू से ही कवि सम्मेलनों का हिस्सा हुआ करते थे।

देश के प्रति लगाव 25 साल की उम्र से ही उनकी रचनाओं में देखा जाने लगा। 1940 में आई फिल्म ‘बंधन’ में उनका लिखे गाने ‘चल चल रे नौजवान’ ने उनको पहचान दिलाई। सिनेमा जगत में उनके काम को लेकर 1997 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के दिया गया।

फिल्म के बाद दोबारा चलाया जाता था प्रदीप का गाना

इसके बाद प्रदीप ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक बेमिसाल गाने लिखते चले गए। फिल्म ‘किस्मत’ में उनका लिखा देशभक्ति गीत ‘दूर हटो ऐ दुनियावालों हिंदुस्तान हमारा है’ करोड़ों भारतीयों का पसंदीदा गाना बन गया। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जब सिनेमा हॉल में फिल्म खत्म होती थी तो लोगों के लिए ये गाना अलग से फिर चलाया जाता था।

गीतों में देशभक्ति हमेशा झलकती रही

कवि प्रदीप को अपने देशभक्ति गीतों से ज्यादा लोकप्रियता मिली। उनके देशभक्ति गीतों में कई यादगार गीत जैसे ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की’, ‘हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के’ और ‘दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल’ जैसे गीत शामिल हैं।

ऐ मेरे वतन के लोगों गीत सुन रोने लगे लाखों लोग

कवि प्रदीप की कलम से जब ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’…गीत निकला तब स्वर कोकिला लता ने उस गीत को अपने सुरों में पिरोया। कहा जाता है कि ये गाना जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को सुनाया गया तो उनकी और लाखों लोगों की आंखें भर आई। कवि प्रदीप ने अपने कॅरियर में 72 फिल्मों के लिए करीब 1,700 से अधिक गाने लिखे।

आजादी के बाद आज भी कवि प्रदीप के गीत जब भी हमारे कानों में पड़ते हैं तो हमारी धड़कनें तेज हो जाती है। कवि प्रदीप नाम के सितारे सदी में बहुत कम होते हैं और आज भी इनके गीत हमारे अंदर देशभक्ति का जज़्बा जगाते हैं।

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