FlashBack: 2008 का पर्थ टेस्ट, मंकी गेट प्रकरण और फील्ड अंपायरों के गलत फैसले

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टीम इंडिया अब से कुछ ही दिनों में आॅस्ट्रेलिया के लंबे दौरे पर होगी। एशेज सीरीज के बाद आॅस्ट्रेलिया में होने वाले इस दौरे को लेकर पूरी दुनिया में रोमांच रहता है। यादों के झरोखों से देखें तो टीम इंडिया के पास याद करने के लिए कुछ ज्यादा अच्छा नहीं है लेकिल जो बुरी यादें हैं उनमें हार और विवादों का पुलिंदा पड़ा है। भारतीय टीम ने आॅस्ट्रेलिया में कुल मिलाकर 5 ही टेस्ट जीतें हैं और आखिरी बार टीम ने साल 2008 के दौरे पर पर्थ टेस्ट जीता था। ये वही पर्थ का पिच है जिसे बल्लेबाजों का कब्रिस्तान कहा जाता है। साल 2008 का वो दौरा आज तक हर किसी भारतीय और आॅस्ट्रेलियाई क्रिकेट प्रेमी के जहन में आज भी होगा क्योंकि उस दौरे पर कई ऐसे वाकये घटे जो शायद ही क्रिकेट के इतिहास में पहले कभी किसी दो टीमों के बीच घटे होंगे।

पर्थ की विकेट को बल्लेबाजों की क​ब्रगाह भी कहा जाता है

पर्थ टेस्ट: जब सचिन द्रविड़ ने दिखा दिया कि वो कौन हैं और उनका स्तर क्या है

विवादित सिडनी टेस्ट की बात हम बाद में करेंगे पहले बात करते हैं पर्थ टेस्ट की जो 16 जनवरी 2008 को बल्लेबाजों की कब्रगाह मानी जाने वाली पिच पर खेला गया जहां भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। आॅस्ट्रेलिया ने सबको चौंकाते हुए इस टेस्ट में चार तेज गेंदबाजों को शामिल किया और एक भी विशेषज्ञ स्पिनर को टीम में जगह नहीं दी गई। आॅस्ट्रेलिया के इरादे साफ थे कि वो अपने कहर बरपाते गेंदबाजी आक्रमण से भारतीय बल्लेबाजों को खौफजदा कर देंगे। खैर, बल्लेबाजी शुरू करने आए ओपनर वसीम जाफर और विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग दोनों ही 16 और 29 रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए। बाद में सचिन तेंदुलकर 71 और राहुल द्रविड़ 93 ने टीम को संकट से उबारा। ऐसे करके टीम इंडिया ने कुल मिलाकर 330 रन बनाए और आॅल आउट हो गई।

तेज गेंदबाज आरपी सिंह की कहर बरपाती गेंदबाजी की बदौलत टीम इंडिया ने आॅस्ट्रेलिया को मात्र 212 रनों पर समेट दिया। जिसके बाद दूसरी पारी में फिर से भारत की पारी शुरू हुई भारत के पास 118 रनों की बढ़त थी। भारत की दूसरी पारी 294 रनों पर सिमटी और एकबार फिर से वैरी वैरी स्पेशल लक्ष्मण ने टीम के लिए अंत में जुझारू पारी खेली और 79 रन बनाए। कुल मिलाकर आॅस्ट्रेलिया को 413 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य मिला वो भी ऐसी पिच पर जो बल्लेबाजों की मदद नहीं कर रही थी। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण ने मिलजुलकर आॅस्ट्रेलिया की आखिरी पारी को 340 रनों पर समेट दिया और भारत 72 रनों से ये टेस्ट मैच जीत गया।

 

पर्थ टेस्ट जीतने की खुशी निलंबित हरभजन से ज्यादा और किसे हो सकती थी

 

 

सिडनी टेस्ट: जब अंपायरों से हारा भारत

जी हां, पर्थ टेस्ट में टीम इंडिया ने सिडनी टेस्ट की हार का बदला लिया था क्योंकि सिडनी टेस्ट में जो बर्ताव भारतीय टीम के साथ हुआ था वो अब तक किसी टीम के साथ नहीं हुआ था। सिडनी टेस्ट में अंपायरिंग कर रहे स्टीव बकनर और मार्क बैनसन ने मैच में कई विवादित फैसले दिए और भारत को यह मैच 212 रनों से हारना पड़ा।

वीडियो में देखिए किस तरह अंपायरों ने दिए थे कुछ गलत फैसले

इसी मैच में भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह और आॅस्ट्रेलियाई आॅलराउंडर एंड्रयू सायमंडस के बीच जोरदार झड़प हुई थी। सायमंड्स ने भज्जी पर उन्हें बंदर कहकर चिढ़ाने का आरोप लगाया था जिसके बाद आईसीसी ने तीन टेस्ट मैचों के लिए भज्जी को सस्पेंड कर दिया था। टीम इंडिया ने आईसीसी के इस फैसले का विरोध किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही दौरा बीच में छोड़कर चले जाने की धमकी दे डाली।

                                   अंपायरिंग का जिम्मा खुद ही संभालते हुए तत्कालीन आॅस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग

 

भज्जी पर ठीक तरह से आरोप साबित नहीं हो पाए लेकिन अपने इशारों से अंपायरों को फैसला दिलवाने वाले आॅस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंकी गेट प्रकरण को आज तक याद किया जाता है।

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