शर्मनाक: अकेले मध्य प्रदेश में हर रोज होती है 92 बच्चों की मौत वो भी कुपोषण से

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Malnutrition

मध्य प्रदेश में इसी साल चुनाव होने हैं। सभी पार्टियों ने अपनी कमर भी कस ली है। आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। लेकिन मध्य प्रदेश की राजनीति मुद्दों से भटक रही है। मध्य प्रदेश के ही श्योपुर को इथोपिया ऑफ भारत कहा जाता है। सितंबर 2016 में अकेले इस जिले में 116 बच्चों की मौतें दर्ज की गई वो भी सिर्फ कुपोषण से।

शिवराज अपनी उपलब्धियों का हमेशा गुणगान करते हैं और पार्टी हमेशा ही पोषण और आहार से संबंधित चीजों को लेकर खुद की तारीफें करते ही रहते हैं। ऐसे में ये तथ्य सरकार की कथनी और करनी में अंतर को साफ दिखाते हैं।

असल मुद्दा यही था सरकार पर दबाव बना भी फिर इस समस्या पर सरकार द्वारा श्वेत पत्र लाने का ऐलान किया गया।

श्वेत पत्र का मतलब होता है कि सरकार कुपोषण को दूर करने के लिए हर तरह की नीति अपनाती है। अपनी उपलब्धियां गिनाती है। कुपोषण से कैसे लड़ा जाए इसके बारे में कमेटी और चर्चा का गठन होता है। लेकिन हुआ क्या?

सरकार का श्वेत पत्र अभी तक नहीं आया। 2 साल बाद भी श्वेत पत्र बस चर्चाओं में है। जहां प्रदेश में हर दिन 92 बच्चों की मौत सिर्फ कुपोषण से होती है वहां श्वेत पत्र जैसे कदम बहुत जरूरी है।

आपको हैरानी होगी लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2016 से लेकर जनवरी 2018 तक 57000 बच्चों की मौत हो गई वो भी कुपोषण से।

गौर करने वाली बात ये है कि आंकड़े सरकारी ही हैं और अधिकतर कहा यही जाता है कि सरकार आंकड़ों को कम करके ही दिखाती है।

राज्य सरकार कहीं ना कहीं इसे नजरअंदाज कर रही है। आगामी चुनाव में भी सरकार इसे नजर अंदाज ही करने वाली है। विपक्ष भी किसी और तरह की राजनीति में उलझा हुआ है। उम्मीद यही की जानी चाहिए कि सरकार इसके लिए ठोस से ठोस कमद उठा सके।

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