गजानन माधव मुक्तिबोध: ऐसा कवि जिनका एक भी काव्य संग्रह अपने जीवनकाल में नहीं छपा

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हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक और कथाकार गजानन माधव मुक्तिबोध की 13 नवंबर को 102वीं जयंती हैं। वह नया खून और वसुधा आदि पत्रिकाओं के सहायक-संपादक भी रहे। उन्हें हिंदी कविता में प्रगतिशील ​कविता और नई कविता के बीच का सेतु माना जाता है।

जीवन परिचय

गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के श्योपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम माधवराव और माता का नाम पार्वती बाई था। उनके पिता पुलिस अधिकारी थे। इस वजह से उनका बचपन बड़े ही सुख में गुजरा। परंतु आद में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

उन्होंने वर्ष 1938 में होल्कर कॉलेज से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। गजानन के पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा वकील बने लेकिन उनकी रुचित अध्यापन में अधिक थी। उन्होंने वर्ष 1954 में वाराणसी से प्रकाशित ‘हंस’ नामक पत्रिका का संपादन करना शुरू कर दिया। जब वह वहां से ऊब गए तो नागपुर आ गए। यहीं से उनके जीवन का संघर्ष आरंभ हुआ। वर्ष 1955 में वह राजनांद गांव के दिग्विजय कॉलेज में अध्यापक बन गए।

साहित्यिक कॅरियर

उनका पहला काव्य संग्रह वर्ष 1964 में ‘चांद का मुंह टेढ़ा है’ प्रकाशित हुई थी, उस समय वह मृत्यु शय्या पर थे। वह अपनी रचनाओं के प्रकाशन का प्रबंधन नहीं कर सके थे। उन्हें हिंदी कविता में प्रगतिशील कविता और नई कविता (आधुनिक कविता) आंदोलन के बीच एक सेतु माना जाता है।

उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से उच्च जातियों पर प्रहार किया था। उन्होंने हिंदी फिल्म ‘सतह से उठा आदमी’ के लिए पटकथा और संवाद भी लिखा। जिसे फिल्म निर्देशक मणि कौल द्वारा निर्देशित की गई और वर्ष 1981 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई। वर्ष 2004 में मुक्तिबोध की कहानी ‘ब्रह्मराक्षस का शिष्य’ पर सौम्यब्रत चौधरी द्वारा एक नाटक बनाया गया।

प्रमुख कृतियां

गजानन माधव मुक्तिबोध ने अपने जीवनकाल में हिंदी की कई विधाओं में लेखन कार्य किया था।

काव्य संग्रह – चांद का मुंह टेढ़ा है, भूरी भूरी खाक धूल।
चिंतन – एक साहित्यिक की डायरी, नयी कविता का आत्मसंघर्ष, नये साहित्य का सौंदर्य शास्त्र।
आलोचना – कामायनी : एक पुनर्विचार।
इतिहास – भारत का इतिहास और संस्कृति।
कहानी संग्रह – काठ का सपना, सतह से उठता आदमी।
उपन्यास – विपात्र।

निधन

गजानन माधव मुक्तिबोध का 11 सितंबर, 1964 को 46 वर्ष की आयु में हबीबगंज में निधन हो गया।

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