‘होंठों से छू लो तुम’ जैसी प्रसिद्ध गजलें गाकर हमेशा के लिए अमर हो गये गजल सम्राट जगजीत सिंह

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अपनी गजल गायकी से सबको मोहित करने वाले गजल सम्राट जगजीत सिंह की 10 अक्टूबर को 8वीं डेथ एनिवर्सरी हैं। उन्होंने ‘वो कागज की कश्ती’, ‘झुकी-झुकी सी नजर’, ‘होंठों से छू लो तुम’ जैसी प्रसिद्ध गजलें गाकर लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए। जगजीत सिंह की भारी और दर्द से भरी आवाज की वजह से गजल गायकी में दूसरा कोई उनका सानी नहीं है।

जीवन परिचय

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी, 1941 को राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में हुआ। उनका वास्तविक नाम जगमोहन सिंह धीमन था। उन्हें बचपन में म्यूजिक टीचर पंडित छगनलाल शर्मा के यहां संगीत की ट्रेनिंग के लिए भेजा था।

संगीत की दुनिया में जगजीत सिंह ने अपना करियर बनाने का फैसला ले चुके थे, लेकिन उन्हें संघर्ष करना पड़ा। शुरूआत में वे विज्ञापन के लिए जिंगल गाते थे। यहीं से उनकी मुलाकात चित्रा सिंह से हुई। हालांकि जगजीत सिंह की भारी आवाज की वजह से ने चित्रा ने पहले तो उनके साथ गाने से ही मना कर दिया था। परन्तु बाद में दोनों में धीरे-धीरे दोस्ती हुई और फिर यही दोस्ती वैवाहिक संबंध में तब्दील हो गया।


जगजीत से शादी से पहले शादीशुदा थी चित्रा सिंह

चित्रा सिंह की पहली शादी ब्रिटानिया बिस्किट कंपनी में कार्यरत अधिकारी देबू प्रसाद दत्ता से हो चुकी थी। उन दोनों के एक बेटी भी थी। जगजीत सिंह और चित्रा की मुलाकातों का सिलसिला बढ़ने लगा तो चित्रा ने देबू से तलाक ले लिया और जगजीत सिंह ने देबू से चित्रा से शादी करने की अनुमति मांगी। देबू सेे शादी की इजाजत लेकर जगजीत ने चित्रा से शादी कर ली।

सन 1990 के समय उनके साथ बड़ी दुर्घटना घटित हुई जिसने दोनों को एकदम खामोश कर दिया। जगजीत और चित्रा के इकलौते बेटे विवेक का कार हादसे में निधन हो गया। इस वजह से जगजीत सिंह छह महीने तक एकदम खामोश हो गए जबकि चित्रा सिंह इस हादसे से कभी उबर नहीं पाईं और उन्होंने गायकी छोड़ दी। लेकिन जगजीत ने कुछ समय बाद खुद को संभाला और इस हादसे के बाद गाई गईं उनकी गजलों में बेटे को खो देने का दर्द साफ झलकता था।

1970 और 1980 के दशक में उन्होंने अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ एक से एक बेहतरीन गजलें गाईं और देश-विदेश में अपनी आवाज का डंका बजाया। जगजीत सिंह को दुनिया में गजल को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय जाता है। उनकी पहली एलबम ‘द अनफॉरगेटेबल्स’ (1976) हिट रही।

वहीं उन्होंने फिल्मों के अतिरिक्त ‘कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा’, ‘सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता-आहिस्ता’, ‘वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी’ जैसी मशहूर गजलें गायी हैं। जगजीत सिंह ने 150 से ज्यादा एलबम बनाईं। फ़िल्मों में गाने भी गाए, लेकिन गजल व नज्म के लिए उन्हें विशेष रूप से लोकप्रियता प्राप्त है।
जगजीत सिंह को भारत सरकार की ओर से वर्ष 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

निधन

अपनी गजल गायकी से श्रोताओं के बीच अमिट छाप छोड़ने वाले जगजीत सिंह ने 10 अक्टूबर, 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भले वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जादुई आवाज़ आने वाली पीढ़ी को अपना बनाकर रखने का माद्दा रखती हैं।

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