पुण्यतिथि विशेष: बेहतरीन निर्देशक, दमदार एक्टर और बेमिसाल पटकथा लेखक थे ऋत्विक घटक

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हिंदी सिनेमा में ऋत्विक घटक को एक ऐसे निर्देशक के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिये समाज की तल्ख सच्चाई बंया की। ऋत्विक फिल्म निर्माता, निर्देशक होने के साथ ही पटकथा लेखक भी थे। सिनेमा में ऋत्विक का दर्जा सत्यजीत रे और मृणाल सेन के बराबर है। ऋत्विक घटक का जन्म 4 नवंबर, 1925 को ढ़ाका में जन्मे ऋत्विक 6 फरवरी, 1976 को दुनिया छोड़ चले। पुण्यतिथि के मौके पर आइए उनके सिनेमाई सफर पर डालें एक नजर।

पहला नाटक द डार्क लेक 

साल 1948 में घटक ने अपना पहला नाटक ‘द डार्क लेक’ लिखा।  साल 1951 में वे इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन से जुड़े। इस दौरान उन्होंने कई नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय भी किया। थिएटर की दुनिया में उन्होंने आखिरी नाटक 1957 में ‘ज्वाला’ लिखा और निर्देशित किया।

फिर शुरु हुआ फिल्मी सफर

बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि ऋत्विक ने 1957 में ही ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मुसाफिर’ से बॉलीवुड में कदम रख दिया था इस फिल्म की स्क्रिप्ट ऋत्विक ने ही लिखी थी। पहली ही फिल्म को मिली जबरदस्त सफलता ने उन्हें सिने पर्दे पर कुछ करने के लिए प्रेरित किया।

हालांकि ऋत्विक ने  1950 में ही फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख लिया था। निमाई घोष की फिल्म ‘चिन्नामूल’ के साथ उन्होंने एक्टिंग और सहायक निर्देशक के रुप में डेब्यू किया। इसके बाद उनकी फिल्म नागरिक रिलीज हुई जो भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई।

मधुमती से मिली पटकथा लेखक के रूप में सफलता

साल 1958 में रिलीज हुई फिल्म ‘मधुमती’ ऋत्विक के सिने कॅरियर की पहली व्यावसायिक सफल फिल्म थी। जिसकी कहानी पुनर्जन्म पर आधारित थी। फिल्म का निर्देशन बिमल रॉय ने किया था।

भारतीय सिनेमा को दी बेहतरीन फिल्में

ऋत्विक घटक आठ फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध फ़िल्में, ‘मेघे ढाका तारा’ (1960), ‘कोमल गंधार’ (ई-फ्लैट) (1961) और ‘सुवर्णरिखा’ (1962),थी। तीनों फिल्मों में, उन्होंने एक बुनियादी कहानी का इस्तेमाल किया।उनकी आखिरी फिल्म ‘युक्ति, बहस और कहानी’ (1974) थी जिसमें उन्होंने मुख्य चरित्र नील्कंठो (नीलकंठ) की भूमिका निभाई।

अत्यधिक शराब के सेवन और उसके फलस्वरूप होने वाले रोगों के कारण उनके खराब स्वास्थ्य की वजह से उनके लिए फ़िल्में बनाना मुश्किल हो गया और 6 फरवरी, 1976 को उनका निधन हो गया।

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