राजस्थान : चुनावों में महिला नेता है गायब, कुछ को टिकट देकर हुई खानापूर्ति

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अधिकांश राजनीतिक दल लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला सशक्तिकरण को अपने एजेंडे के रूप में रखते हैं लेकिन उनके द्वारा दी गई टिकटों में महिला उम्मीदवारों की संख्या कुछ और ही कहानी कहती है। जयपुर जिले में, 19 निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां ना के बराबर महिलाएं इस बार चुनाव में उतर रही है।

पिछले दो दशकों की बात करें तो 1998 में बैरठ से कमला, सांगानेर से इंदिरा मायाराम या 2008 में बगरू से गंगा देवी जैसे कुछ नाम ही महिला प्रतिनिधित्व की तस्वीर पेश करते हैं।

राजस्थान महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रेहाना रेयाज का कहना है कि “राजनीतिक दलों में शायद एक मानसिकता है कि महिलाएं अभी भी चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं हैं। यह सोच कोई नई नहीं है दशकों से लोगों के दिमाग में कुछ ऐसा ही है, हालांकि यह धीरे-धीरे बदल रहा है। वास्तविकता में, महिलाएं बेहद कुशलता से जमीनी स्तर पर काम कर रही है और प्रभावी राजनेता साबित हो रही है लेकिन उन्हें केवल मौकों की जरूरत है।”

हालांकि राजस्थान से वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन जब महिलाओं के प्रतिनिधित्व की बात आती है तो राज्य की राजधानी जयपुर बुरी तरह फेल हो जाती है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब चुनाव टिकटों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की विचारधारा की बात आती है तो महिलाएं ‘कम मुखर’ होती हैं।

राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा का इस बारे में कहना है कि “यह वास्तव में आश्चर्य की बात है कि राजनीतिक दलों में महिलाएं होने के बावजूद राज्य की राजधानी में शायद ही कोई महिला प्रतिनिधित्व हो। यह संभवतः इसलिए है क्योंकि हम में से अधितकर पार्टी या संगठन का निर्णय ही मान लेते हैं, लेकिन जयपुर राज्य की राजधानी होने के नाते महिला उम्मीदवारों को आगे लाना अहम है। महिलाएं वो हैं जो वास्तव में रसोई से वोट भी निकाल सकती है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 शायद महिलाओं को आगे लाने के लिए अहम चुनाव साबित हो सकता है। इस बार बगरू से गंगा देवी और मालवीय नगर से अर्चना शर्मा के साथ 27 महिला उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है।

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