क्यों मनाया जाता है ईद-ए-मिलाद, क्या मान्यताएं जुड़ी हैं इस दिन से?

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ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पैगम्बर मोहम्मद के जन्म दिन के रूप में हर साल मानाया जाता है। ऐसा मानना है कि 570 CE में इस दिन मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था।

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद पैगंबर मोहम्मद और उनकी शिक्षाओं को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन पैगंबर की प्रशंसा में मिलाद गाए जाते हैं और यह भी माना जाता है कि उनको सुनना आपको शांति और ईश्वर के और भी करीब लाता है।

हालांकि यह दिन शिया और सुन्नी द्वारा अलग-अलग तरीकों और मान्यताओं से मनाया जाता है। शिया समुदाय का मानना है कि इस दिन पैगंबर मुहम्मद ने हजरत अली को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। दूसरी तरफ, सुन्नी समुदाय, इस दिन, पूरे दिन मीटिंग्स का आयोजन करते हैं।

कई देश इस दिन बड़ा आयोजन करते हैं और सड़कों और घरों को सजाते भी हैं। दुआओं को पढ़ा जाता है और पैगंबर की जरूरतमंद और कहानियों के बीच मिठाई वितरित की जाती है।

इसे दुनिया भर में मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि यह पवित्र पैगंबर की दयालुता, करुणा और शिक्षाओं को याद दिलाता है। उनके भक्त उनके प्रति सम्मान और प्रेम दिखाते हैं। कई देशों में जुलूस भी निकाले जाते हैं। इस दिन सभी लोग पैगंबर मोहम्मद और अपने पूर्वजों को याद करते हैं।

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