नरेन्द्र मोदी जनता से नमो ऐप के जरिए 5 रूपए क्यों मांग रहे हैं?

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि आप खुद के नाम पर एक ऐप के माध्यम से कहीं भी 5 रुपये और 1,000 रुपये दान करें। उनका कहना है कि इससे राजनीति में पारदर्शिता आएगी। लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहले कुछ फैक्ट्स को जान लेना जरूरी है।

सबसे पहली बात बीजेपी को इतनी छोटी रकम की जरूरत नहीं है। पार्टी इतनी समृद्ध है कि उसने अकेले 2016-17 में 1000 से अधिक करोड़ रुपये की कमाई की। इसके विपरीत कांग्रेस ने इसी अवधि में 225 करोड़ रुपये कमाए। आगे आने वाले चुनाव में भी पार्टी के पास पैसों की कोई भी कमी दिखाई नहीं देने वाली है।

यदि प्रधानमंत्री जी पारदर्शिता ही इसके माध्यम से चाहते हैं तो अपारदर्शिक तरीकों से क्यों पार्टी में फंडिंग होती है। तीसरा, नामो ऐप ने पहले ऐसा दान क्यों नहीं मांगा? यह कार्यक्रम 201 9 के आम चुनावों से कुछ महीने पहले क्यों आया?

चौथा, ऐसा है कि 5 रुपये के रूप में दान मांगकर, पार्टी एक गरीब और आम आदमी की पार्टी की छवि चित्रित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन बीजेपी ने प्रचार पर कितना पैसा खर्च किया, क्या उन्हें सच में लगता है कि कोई भी उन्हें पार्टी के रूप में इतना गरीब मानेंगे कि वह पांच रुपये मांग रही है? यदि यह एक छवि बनाने वाला अभ्यास है तो इससे शायद ही पार्टी को फायदा हो। पार्टी डोनेशन से पैसे नहीं चाहती ना ही वो कोई इमेज बना रही है। वो लोगों में एक विश्वास जगाना चाहती है।

एक बार जब कोई डोनेशन देता है तो वो कहीं ना कहीं पार्टी में अपना विश्वास मजबूत कर रहा होता है। नमो ऐप यूज करने वाले पहले से ही मोदी समर्थक हैं ये फैक्ट है। नमो ऐप पर डोनेशन इन्हीं समर्थकों को मजबूत करने के लिए मांगा जा रहा है वरना इससे कई ज्यादा रकम पार्टी में अपारदर्शक रूप से जमा होती है।

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