विशेष: महज 29 साल की उम्र में जामिया मिलिया के वाईस चांसलर बन गए थे डॉ. ज़ाकिर हुसैन

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भारत के एक पूर्व राष्ट्रपति ऐसे थे जो देश की आज़ादी के आंदोलन के समय अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ महात्मा गांधी के साथ रहने लगा था। हम बात कर रहे हैं भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन की जो देश में आधुनिक शिक्षा के बड़े समर्थकों में से एक माने जाते थे। ज़ाकिर को महज 29 साल की उम्र में जामिया मिलिया इस्लामिया का वाईस चांसलर बनने का मौका मिला था। 8 फरवरी को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन की 125वीं जयंती है। ऐसे में इस मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ अनसुनी बातें..

महज 8 साल की उम्र में पिता को खोया

डॉ. ज़ाकिर हुसैन का जन्म 18 फरवरी, 1857 को हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में एक पठान परिवार में हुआ था। मात्र 8 साल की छोटी उम्र में ही डॉ. ज़ाकिर के पिता का देहांत हो गया था। वे अपनी पढ़ाई के दौरान महात्मा गांधी से खासा प्रभावित हुए और पढ़ाई बीच में छोड़ आज़ादी की लड़ाई में कूद गए। देश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने का काम गांधीजी ने जाकिर हुसैन को दिया था, जिसके बाद वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति बने। शिक्षा के अलावा वे वर्ष 1992 से 1997 तक उन्होंने राज्यसभा सदस्य के तौर पर भी काम किया। डॉ. जाकिर हुसैन को ‘पद्म विभूषण’ और देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नवाजा गया।

जब जामा मस्जिद से हुआ जीत का ऐलान

देश के साथ-साथ ख़ास तौर पर दिल्ली में डॉ. जाकिर हुसैन को पसंद किया जाता था। जब वे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे तो नतीजे वाले दिन लोग राष्ट्रपति भवन के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे। आखिरकार 6 मई, 1967 को ऑल इंडिया रेडियो पर जाकिर हुसैन की जीत का ऐलान किया गया और 13 मई, 1967 को उन्होंने देश के तीसरे और पहले मुस्लिम राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला। उनकी इस जीत का ऐलान दिल्ली की जामा मस्जिद से किया गया।

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