विशेष: आर. के. नारायण की प्रसिद्ध कृति पर ही आधारित था दूरदर्शन का ‘मालगुडी डेज’ सीरियल

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भारत में अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासकारों में से एक आर. के. नारायण की 13 मई को 20वीं पुण्यतिथि है। उन्होंने दक्षिण भारत के एक काल्पनिक शहर मालगुड़ी को आधार बनाकर अपनी रचनाएं लिखीं। वर्ष 1960 में उन्हें उपन्यास ‘गाइड’ के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। इस उपन्यास पर बॉलीवुड में फिल्म बन चुकी है, जो काफी सफल भी रहीं। उपन्यासकार आर. के. नारायण को वर्ष 2000 में भारत सरकार ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं उनके बारे में…

आर. के. नारायण का जीवन परिचय

उपन्यासकार आर. के. नारायण का जन्म 10 अक्टूबर, 1906 को तमिलनाडु के मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में हुआ था। उनका पूरा नाम रासीपुरम कृष्णास्वामी नारायणस्वामी हैं। उनके पिता तमिल भाषा के शिक्षक हुआ करते थे। उनकी दादी ने उन्हें ‘कुंजप्पा’ के उपनाम से पुकारती थी। उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया था। नारायण ने वर्ष 1930 में अपनी शिक्षा पूरी कर ली थी। उसके बाद उन्होंने कुछ समय अध्यापन कार्य करवाया, लेकिन जल्द ही वह पूर्णरूप से लेखन कार्य में जुट गए।

पहला उपन्यास वर्ष 1935 में प्रकाशित हुआ

आर. के. नारायण ने अपना लेखन कार्य अंग्रेजी साहित्य में किया। उनका पहला उपन्यास ‘स्वामी एंड फ्रेंड्स’ वर्ष 1935 में प्रकाशित हुआ था। यह उपन्यास एक स्कूली लड़के स्वामीनाथन के स्कूली जीवन की बेहद मनोरंजक घटनाओं पर लिखा गया। इसमें एक स्कूली लड़के की सामान्य शरारतों और उसके एवज में मिलने वाली सजाओं का वर्णन है। इसके बाद उनका वर्ष 1937 में ‘स्नातक’ (द बैचलर ऑफ आर्ट्स) उपन्यास प्रकाशित हुआ। इसमें उन्होंने एक संवेदनशील युवक चंदन के माध्यम से उसकी पढ़ाई, प्रेम और विवाह संबंधी पश्चिमी विचारों का अपने सामाजिक ढांचे के बीच उठते सवालों को दर्शाया।

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आरके नायरण के कुछ अन्य प्रमुख उपन्यास

‘द डार्क रूम’ 1938, ‘द इंग्लिश टीचर’ 1945, ‘मिस्टर संपथ’ 1947, ‘द फ़ाइनेंशियल एक्सपर्ट’ 1952, ‘वेटिंग फ़ॉर द महात्मा’ 1955, ‘द गाइड’ 1958, ‘द मैन इटर ऑफ़ मालगुडी’ 1961, ‘द वेंडर ऑफ़ स्वीट्स’, ‘द पेंटर ऑफ़ साइंस’, ‘ए टाइगर फ़ॉर मालगुडी’, ‘टाल्केटिव मेन’ 1976, ‘द वर्ल्ड ऑफ़ नागराज’ 1990 और ‘ग्रेन्डमदर्स टेल’ 1992 आदि हैं।

आर. के. नारायण द्वारा लिखित कुछ निबंध

उपन्यासकार आर. के. नारायण ने अंग्रेजी भाषा में कई निबंध भी लिखे हैं। उनमें प्रमुख हैं— नेक्स्ट सन्डे, रिलक्टेंट गुरु, अ व्रितेर्स नाईटमेयर, द वर्ल्ड ऑफ़ स्टोरी-टेलर, अन्य कृतिया— माय डेज, माय डातेलेस डायरी, द एमराल्ड रूट, गोडस, डेमोंस एंड ओठेर्स।

अंग्रेजी नॉवलिस्ट नारायण साहब की प्रसिद्ध कहानियां

आरके नारायण की कहानियां कई संग्रह में संकलित है, जो निम्न हैं- ‘मालगुडी डेज’ (1942), ‘अ हॉर्स एण्ड गोट्स एण्ड अदर स्टोरीज़’ (1970), ‘अं​डर द बैनियन ट्री एंड अदर स्टोरीज़’ (1985)।

इनके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय महाकाव्यों रामायण- 1972 और महाभारत- 1978 का संक्षिप्त आधुनिक गद्य संस्करण भी प्रकाशित किया है। उनकी दो खण्डों वाली आत्मकथा का शीर्षक ‘माई डेज़- अ मे’म्वा एण्ड माई डेटलेस डायरी- एन अमेरिकन जर्नी’ है।

‘मालगुडी डेज’ धारावाहिक को हिंदी दर्शकों ने खूब सराहा

आर. के. नारायण ने आमतौर पर मानवीय पहलुओं पर दैनिक जीवन में घटित घटनाओं का चित्रण किया हैं, जिसमें शहरी जीवन, पुरानी परंपराओं के साथ टकराहट है। उनकी लेखन शैली शालीन है, जिसमें सुसंस्कृत हास्य, लालित्य और सहजता का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी ‘मालगुडी की कहानियां’ में अद्भुत रोचक कहानियों का संकलन है। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध क्षेत्र मैसूर और चेन्नई में उन्होंने आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच यहां-वहां ठहरते साधारण चरित्रों को देखा और उन्हें अपने असाधारण कथा-शिल्प के माध्यम से उन्हें अपनी कहानियों के पात्र बना लिए। ‘मालगुडी डेज’ पर दूरदर्शन ने टीवी सीरियल बनाया जिसे हिंदी दर्शकों ने खूब सराहा।

आरके नारायण को मिले पुरस्कार और सम्मान

प्रसिद्ध उपन्यासकार आर. के. नारायण ने भारत में अंग्रेजी साहित्य के विकास में खूब योगदान किया, जिसके कारण उनको कई पुरस्कार और सम्मान मिले। उन्हें भारत सरकार ने वर्ष 1964 में ‘पद्म भूषण’ और वर्ष 2000 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया। वर्ष 1960 में उनकी कृति ‘द गाइड’ के लिए उन्हें ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार प्राप्त हुआ था। आरके नारायण रॉयल सोसायटी ऑफ लिटरेचर के फेलो और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आटर्स एण्ड लैटर्स के मानद सदस्य भी रहे। नारायण को रॉयल सोसायटी ऑफ लिटरेचर द्वारा 1980 में ए.सी. बेसन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

तमिलनाडु के चेन्नई शहर में हुआ निधन

अंग्रेजी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आर. के. नारायण का 13 मई, 2001 को चेन्नई में निधन हुआ और इस साहित्यकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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