ज़ाकिर हुसैन : वो राष्ट्रपति जिसके जीतने का इंतजार पूरा दिल्ली कर रहा था !

भारत का वो पूर्व राष्ट्रपति जिसने देश की आजादी के लिए अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ महात्मा गांधी के साथ रम गया, वो पूर्व राष्ट्रपति जिसको महज 29 साल की उम्र में जामिया मिलिया इस्लामिया का वाईस चांसलर बनने का मौका मिला। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की जिन्होंने देश में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखी।

आज 3 मई 1969 को ज़ाकिर हुसैन का निधन हुआ, ऐसे में आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ अनसुनी और रोचक बातें।

8 साल की उम्र में उठ गया पिता का साया

ज़ाकिर हुसैन का जन्म 18 फरवरी 1857 को हैदराबाद में हुआ। महज 8 साल की छोटी उम्र में ही जाकिर के पिता का देहांत हो गय़ा। पढ़ाई करने के दौरान गांधी से खासा प्रभावित हुए कि पढ़ाई छोड़ आज़ादी की लड़ाई में कूद गए।

देश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने का काम गांधी जी ने जाकिर हुसैन को दिया जिसके बाद वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति बने।

शिक्षा के अलावा 1992 से 1997 तक उन्होंने राजयसभा सदस्य के तौर पर भी काम किया। जाकिर हुसैन को पद्म विभूषण और सबसे बड़े अवार्ड भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है।

जामा मस्जिद से हुआ जीत का ऐलान

देश के साथ-साथ दिल्ली में खास तौर पर जाकिर हुसैन को पसंद किया जाता था। जब जाकिर राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे तो नतीजे वाले दिन लोग राष्ट्रपति भवन के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे।

आखिरकार 6 मई 1967 को एआईआर पर जाकिर हुसैन की जीत का ऐलान किया गया और 13 मई 1967 को उन्होंने तीसरे राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला।

लोगों में इस कद्र जोश था कि उनकी जीत का ऐलान दिल्ली की जामा मस्जिद से किया गया।

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