पैर छूने आते थे लोग, फिल्मों में मां का पर्याय बन गईं थी निरुपा रॉय

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निरुपा रॉय का नाम जब भी लिया जाएगा सबसे पहले मां की छवि सामने आएगी। बॉलीवुड की आॅनस्क्रीन मां की भूमिका के लिए हमेशा उन्हें याद किया जाता रहेगा। 13 अक्टूबर 2004 को मुंबई में अभिनेत्री निरुपा रॉय का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़ी खास बातें… उनकी शादी केवल 15 साल की उम्र में हो गई थी। उनके पति मुम्बई में राशनिंग विभाग में काम करते थे। एक बार उनके पति ने एक विज्ञापन देखा जिसमें लिखा था, ‘कलाकारों की जरूरत है’ बस, यहीं से निरुपा का एक्टिंग सफर शुरू हुआ। गुजराती फिल्म ‘गणसुंदरी’ से उन्होंने डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने लगभग तीन सौ फिल्मों में काम किया। 40 से 50 के दशक के बीच निरुपा ने कई धार्मिक फिल्मों में काम किया। इनमें अक्सर वे देवी के रूप में नजर आती थीं। वे अपने इन किरदारों के कारण इतनी चर्चित हो गई थीं कि लोग उन्हें असल में देवी का रूप मानने लगे थे। इतना ही नहीं लोग उनके घर उनके दर्शन करने और पैर छूने भी पहुंच जाया करते थे।

भक्ति फिल्मों में माता का रूप निभाने के बाद वे बॉलीवुड में बाद में यूं तो कई​ फिल्मों में विभिन्न किरदार निभाए लेकिन उनके मां किरदार को ही दर्शकों ने ज्यादा पसंद किया। उन्होंने कई फिल्मों में मां का किरदार निभाया और फिल्मी मां की एक नई परिभाषा गढ़ी। अमिताभ बच्चन की मां के किरदार के रूप में उन्होंने कई फिल्में की। उन्हें अमिताभ की रील मां भी कहा जाने लगा था। 1999 में आई फिल्म ‘लाल बादशाह’ में यह दोनों आखिरी बार मां-बेटे के किरदार में नजर आए।

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