क्या है फॉर्मूला ‘एमपी’ जिसे लेकर कांग्रेस में चल रहा है माथापच्ची का दौर

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कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जो फॉर्मूला मध्यप्रदेश के लिए तैयार किया है यदि उसे राजस्थान में भी लागू किया जाता है तो प्रदेश के दो बड़े नेता चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। इस बात पर अंतिम फैसला मंगलवार को कांग्रेस की पहली सूची आने के बाद ही होगा लेकिन इतना जरूर है कि गहलोत—पायलट का चुनाव नहीं लड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। गहलोत—पायलट पहले से ही यहां मुख्यमंत्री पद के लिए दो बड़े चेहरों में से एक हैं जिसे लेकर पहले से ही कांग्रेस दो खेमों में बंटी हुई है। जहां एक तरफ गहलोत कांग्रेस के दिग्गज और अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते हैं तो वहीं पायलट युवा हैं और उनके पास भविष्य के लिए नई सोच है।

 

क्या है मध्यप्रदेश फॉर्मूला:

दरअसल इस फॉर्मूले के तहत चुनावों में कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले नेता चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और उन्हें केवल पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसी तरह का एक फॉर्मूला भाजपा ने भी अपनाने पर विचार किया था जिसके तहत भाजपा के जिलाध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ सकते थे।

 

गहलोत ने किया इशारा, पुराने ही होंगे चेहरे:

दिल्ली में कांग्रेस की सीईसी बैठक के बाद अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत के बाद इस बात की ओर साफ इशारा किया कि पार्टी पुराने और जिताउ चेहरों को मौका देगी। गहलोत का इशारा यही था कि वो और उनके समकक्ष नेता चुनाव मैदान में प्रत्याशी के रूप में फिर से उतरते दिखाई देंगे।

 

अगर लड़े तो कहां से उतरेंगे:

गहलोत अपनी पारंपरिक सीट सरदारपुरा से ही चुनाव लड़ेंगे लेकिन पायलट को लेकर अभी संशय बरकरार है। बताया जा रहा है कि इस बार पायलट या तो अजमेर या फिर दौसा की किसी एक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। बताया ये भी गया है कि पायलट के लिए पार्टी किसी ऐसी सीट का चुनाव करने में लगी है जहां वो भाजपा को कड़ी से कड़ी टक्कर दे सकें ऐसे में भाजपा के गढ़ में पायलट के रूप में सेंधमारी की भी कांग्रेस की कोशिशें जारी हैं।

 

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