केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन, झुका रहेगा राष्ट्रीय ध्वज

Views : 3290  |  0 minutes read

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का आज सुबह निधन हो गया। मोदी सरकार में संसदीय कार्यमंत्री रहे अनंत कुमार 59 साल के थे। वह पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे। कुमार कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने सोमवालर 1 बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली।

कुमार के पार्थिव शरीर को सुबह 9 बजे बाद बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज ग्राउंड पर रखा गया , जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उनके निधन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे देश में राष्ट्रध्वज आधा झुकाने का निर्देश दिया है। इसी के मुताबिक राष्ट्रीय शोक भी मनाया जाएगा।

अनंत कुमार के निधन पर शोक जताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘अनंत कुमार का निधन देश के सार्वजनिक जीवन में बहुत बड़ी क्षति है, खासकर कर्नाटक के लोगों के लिए। उनके परिवार, सहयोगी और अनंत शुभेच्छुओं को मेरी सांत्वना।’

उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, ‘वे कुछ समय से बीमार थे लेकिन ऐसा होगा यह नहीं सोचा था. हमें लग रहा था कि वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे और लोगों की सेवा पुनः शुरू करेंगे। मैं उनकी पत्नी और बच्चों को तहे दिल से सांत्वना प्रेषित करता हूं।’

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘अहम सहयोगी और दोस्त के निधन से दुखी हूं। अनंत कुमार के परिवार और समर्थकों के लिए संवेदनाएं। उन्होंने कर्नाटक में पार्टी को मजबूत किया।’

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, अपने अति वरिष्ठ सहयोगी और मित्र के असामयिक निधन से दुखी और सदमे में हूं। वे एक मंझे हुए सांसद थे जिन्होंने अपनी पूरी काबिलियत से देश की भरपूर सेवा की। लोक कल्याण के लिए उनके जुनून और समर्पण की जितनी तारीफ की जाए, कम है. दुख की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों के साथ हूं।’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘अनंत कुमार जी के निधन से मैं दुखी हूं। उनके परिजनों और मित्रों को मेरी सांत्वना। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ओम शांति।’

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘अनंत जी के निधन से बीजेपी और देश की राजनीति में ऐसा सूनापन पैदा हुआ है जिसे भर पाना मुश्किल है। भगवान उनके परिवार को दुख सहने की क्षमता दे. उनके परिजनों को मेरी सांत्वना।’

अनंत कुमार पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे। बेंगलूरु साउथ से लगातार 6 बार जीत हासिल करने वाले अनंत कुमार को फेफड़ों का कैंसर था। उनका इलाज लंदन और न्यू यॉर्क में भी हुआ था।

लोक​प्रिय नेता थे अनंत, छात्र जीवन से ही आ गए थे राजनीति में

अनंत कुमार दक्षिण से आते थे, लेकिन वे उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों की राजनीति में बीजेपी संगठन की ओर से सक्रिय थे। वे लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से सक्रिय रहे और कई रैलियां की थीं।

वे कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी के बड़े चेहरे और राष्ट्रीय नेता के तौर पर पहचाने जाते थे। उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीतिक में कदम रख दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभावित होकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने। इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल का उन्होंने जमकर विरोध किया। इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

कुमार सबसे पहले एबीवीपी का प्रदेश सचिव और 1985 में राष्ट्रीय सचिव बने। बीजेपी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।

कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी की टिकट पर कुमार ने कांग्रेस के उम्मीदवार नंदन निलकेणी को हराया हैं। इसके बाद मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। इससे पहले अटल सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय का जिम्मा भी संभाला था। उन्हें बीजेपी के दिग्गज नेता एलके आडवाणी के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।

1987 में कर्नाटक बीजेपी के सचिव बने। इसके बाद 1996 में बेंगलुरु साउथ से पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो खरे उतरे और चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा, राजनीतिक की सीढ़ियां लगातार चढ़ते गए।

अटल बिहारी वाजेपीय के नेतृत्व में जब 1998 में पहली बार सरकार बनी तो दक्षिण भारत के कोटे से कुमार को मंत्री बनाया गया। अटल सरकार में उड्डयन मंत्री बनाए गए, वह अटल सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे। इसके बाद 1999 में चुनाव में जीते तो वाजपेयी सरकार में कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

हालांकि, कर्नाटक की सियासी जंग फतह करने के लिए बीजेपी ने 2003 में उन्हें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। इसका नतीजा था कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर राज्य में उभरी। 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी भले ही सत्ता से बाहर हो गई थी, लेकिन कर्नाटक में सबसे ज्यादा संसदीय सीटें जीतने में सफल रही थी।

2004 के उन्हों बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्हें मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों में प्रभारी के तौर पर काम करने किया।

इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में छठी बार लोकसभा सदस्य चुने गए। मोदी सरकार में पहले उन्हें रसायन और खाद मंत्री बनाया गया, लेकिन जुलाई 2016 में संसदीय कार्यमंत्री का जिम्मा भी सौंप दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

COMMENT