राजस्थान : बेटे-बेटियों के सहारे है दोनों पार्टियां, क्या वंशवाद दिला पाएगा वोट ?

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हर बार चुनावों में राजनीतिक पार्टियों पर वंशवाद के आरोप लगते रहते हैं जिसके बाद भी चुनावों में नेताओं के परिवार वालों को धड़ल्ले से टिकट दिए जाते हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही राजनीतिक परिवारों पर अपने दांव खेले हैं।

 दोनों ही दलों ने पूरे सूबे में 26 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिनके पास कोई ना कोई राजनीतिक विरासत है। कांग्रेस ने 18 और बीजेपी ने 8 ऐसे उम्मीदवारों को मौका दिया है। इसको देखते हुए हम कह सकते हैं कि वंशवाद में कोई भी पीछे नहीं है।

पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या को टिकट-

कांग्रेस के राज में हुआ भंवरी देवी हत्याकांड काफी चर्चा में रहा था। इस मामले में आरोपी साबित होने के बाद सजा भुगत रहे पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को ओसियां सीट से टिकट दिया गया है।

आइए एक नजर डालते हैं कांग्रेस ने किन-किन राजनीतिक विरासत वाले बेटों-बेटियों को टिकट थमाया है।

खत्म नहीं हुआ अभी तो लंबी फेहरिस्त है–

— दातारामगढ़ से वीरेंद्र चौधरी (पुत्र विधायक नारायण सिंह)

— चूरू से रफीक मंडेलिया (पुत्र हाजी मकबूल मंडेलिया)

— सवाई माधोपुर से दानिश अबरार (पुत्र दिवंगत केंद्रीय मंत्री अबरार अहमद)

— अनूपगढ़ से कुलदीप इंदौरा (पुत्र हीरालाल इंदौरा)

— निवाई से प्रशांत बैरवा (पुत्र पूर्व सांसद द्वारका प्रसाद बैरवा)

— वल्लभनगर से गजेंद्र सिंह (पुत्र गुलाब सिंह शेखावत)

— मांडवा से रीता चौधरी (पुत्री रामनारायण चौधरी)

— उदयपुर ग्रामीण से विवेक कटारा (पुत्र खेमराज कटारा)

— झुंझुनू से ब्रिजेंद्र ओला पुत्र (पूर्व केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला)

— सागोद से भरत सिंह (पुत्र जूझार सिंह)

इसके अलावा राजाखेड़ा, फुलेरा, डेगाना जैसी सभी सीटों पर राजनीतिक विरासत वाले उम्मीदवारों को ही टिकट दिया गया है।

अगर बीजेपी की बात करें तो यह कहां पीछे हैं-

— डीग-कुम्भेर से शैलेष सिंह (पुत्र दिगंबर सिंह)

— नसीराबाद से रामस्वरूप लांबा (पुत्र दिवंगत सांसद सांवर लाल जाट)

— पिलानी से कैलाश मेघवाल (पुत्र काका सुंदर लाल)

— प्रतापगढ़ से हेमंत मीणा (पुत्र पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा)

— लालसोट से राम विलास (पुत्र राम सहाय)

— बामनवास से राजेंद्र पुत्र (पूर्व विधायक कुंजीलाल)

राजनीतिक पार्टियां राजघरानों या राजनीतिक विरासत वाले इन युवा चेहरों को मौका अपने स्वार्थ पर देती है। इनसे राजनीतिक पार्टियों को ही फायदा होता है क्योंकि पारिवारिक विरासत को छोड़कर राजनीति में आने से इनके साथ एक बहुत बड़ा वोटबैंक भी आता है।

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