बर्थडे स्पेशल: कभी दौड़ने के लिए जूते तक नहीं थे, ऐसी है हिमा दास की कहानी

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Hima-Das

‘ढिंग एक्सप्रेस’, ‘गोल्डन गर्ल’ जैसे नामों से प्रसिद्ध भारत की तेज धाविका (स्प्रिंटर) हिमा दास आज अपना 20वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही है। उनका जन्म 9 जनवरी, 2000 को असम राज्य में नगांव (नौगांव) जिले के कंधुलीमारी गांव में हुआ, जो ढिंग कस्बे के पास है। उनके पिता का नाम रंजीत दास और माता का नाम जोनाली दास हैं। एक निम्न मध्यम वर्गीय 16 सदस्यों के संयुक्त परिवार में जन्मी हिमा के माता-पिता किसान हैं और अपनी 2 बीघा ज़मीन पर धान (चावल) की खेती कर आजीविका चलाते हैं।

हिमा अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके कॅरियर की शुरुआत में साल 2019 बहुत बड़ी कामयाबी वाला रहा। वे पिछले साल मात्र 21 दिनों में छह गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियों में छा गई थीं। ऐसे में हिमा दास के जन्मदिन पर जानते हैं उनके बारे में कुछ और दिलचस्प बातें..

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स्कूल में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थी हिमा

हिमा दास ने अपनी स्कूली शिक्षा ढिंग पब्लिक स्कूल से पूरी की। स्कूल के दिनों में उन्हें फुटबॉल खेलना बहुत पसंद था और वे अक्सर लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं। हिमा हमेशा से ही फुटबॉल को अपना कॅरियर बनाना चाहती थी, हालांकि उन्होंने भारतीय फुटबॉल में कभी अपनी संभावना नहीं देखीं। बाद में जवाहर नवोदय विद्यालय के फिजिकल एजुकेशन टीचर ने उन्हें धावक बनने की सलाह दी। हिमा ने 16 साल की उम्र में रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा। वे मई 2019 में स्कूल ऑफ़ असम से हाई स्कूल ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं।

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जिला स्तर गोल्ड जीता तो हैरान रह गए थे कोच

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से शुरुआत में हिमा दास के पास दौड़ने के लिए अच्छे जूते भी नहीं थे। स्थानीय कोच निपुन दास की सलाह मानकर जब उन्होंने जिला स्तर की 100 और 200 मीटर की स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते तो उनके कोच भी हैरान रह गए। हिमा की दौड़ लगाने की गति अद्भुत थी। इसके बाद निपुन दास ने हिमा को रेसर बनाने की ठान ली और उन्हें लेकर गुवाहाटी आ गए। कोच ने ही उनका खर्च भी वहन किया। एथलेटिक्स के तौर पर शुरुआत में उन्हें 200 मीटर की रेस के लिए तैयार किया गया। बाद में हिमा की क्षमता को देखते हुए उन्हें 400 मीटर की रेस लगाने के लिए भी राज़ी कर लिया।

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छोटे से अंतरराष्ट्रीय कॅरियर में जीत चुकी हैं कई मेडल

हिमा दास ने साल 2019 में 2 जुलाई को पोलैंड में पोज़नान एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स टूर्नामेंट से ट्रैक पर वापसी की, जिसमें उन्होंने 200 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके एक हफ्ते के बाद 13 जुलाई को हिमा दास ने चेक गणराज्य में 23.43 का समय निकालकर क्लादनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर की रेस पूरी कर गोल्ड जीता। 20 जुलाई को एक बार फिर से हिमा दास चेक गणराज्य में नोव मेस्टो की 400 मीटर की दौड़ में शामिल हुईं, जहां उन्होंने अपना 5वां स्वर्ण पदक हासिल किया।

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इससे पहले हिमा दास ने जुलाई में ही 2, 6, 14 और 17 तारीख को भी अलग-अलग इंटरनेशनल स्प्रिंट रेसिंग इवेंट्स की 200 मीटर रेस में चार गोल्ड मेडल जीते थे। हिमा ने 21 दिन के भीतर छह गोल्ड मेडल जीतकर देशवासियों को हैरान कर दिया था। हिमा दास की लगातार सफलताओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी थीं।

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इसके अलावा क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले दिग्गज सचिन तेंडुलकर ने कहा, ‘तुम्हारी जीत की भूख युवाओं के लिए प्रेरणा है।’ हिमा दास पहली ऐसी भारतीय महिला एथलीट हैं, जिसने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप ट्रैक में गोल्ड मेडल जीता है।  उन्होंने 400 मीटर की रेस 51.46 सेकंड में पूरी करते हुए यह रिकॉर्ड अपने नाम किया। हिमा दास को शानदार प्रदर्शन के लिए वर्ष 2018 में ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया।

 

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