कल्पना चावला की ज़िंदगी धरती से 16 मिनट पहले बिखर गई थी, नासा को मिल चुके थे मौत के संकेत

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Kalpana-Chawla-

1 फरवरी, 2003 को एक पल के लिए पूरा देश मानो थम सा गया, इस दिन सुबह से हर जगह टीवी और रेडियो पर लगातार कल्पना चावला की चर्चा हो रही थी कि अचानक खबर आई कि कोलंबिया यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है और उसमें सवार हर अंतरिक्ष यात्री की मौत हो चुकी है। कोलंबिया से लेकर पूरे भारत तक जश्न का माहौल सन्नाटे और मातम में बदल गया। इन्हीं अंतरिक्ष यात्रियों में प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला भी शामिल थी।

कोलंबिया यान अपने 16 दिनों के अंतरिक्ष मिशन को पूरा कर पृथ्वी को लौट रहा था, तभी दुर्भाग्यवश पृथ्वी की कक्षा में आते ही यान क्रैश हो गया और टुकड़े-टुकड़े होकर अमेरिका के टेक्सास शहर पर बरसने लगा। छात्रों को ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित करने वाली कल्पना चावला तो धरती पर कभी वापस नहीं आ सकी, लेकिन हजारों-लाखों बेटियों में कुछ करने का एक जज्बा और अलख जगा गई। 17 मार्च को कल्पना चावला की 58वीं बर्थ एनिवर्सरी हैं, ऐसे में इस ख़ास दिन पर जानते हैं उनकी ज़िंदगी के बारे में कुछ दिलचस्प बातें..

दूसरी अंतरिक्ष यात्रा बना आखिरी सफर

कल्पना चावला ने अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा 19 नवंबर 1997 को शुरू की, जिसमें वो एस टी एस 87 कोलंबिया शटल में सवार होकर अंतरिक्ष गई। अपने पहले सफर के दौरान कल्पना ने 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताए। अपनी पहली उड़ान के बाद कल्पना सफलता की कहानियां लिखने आगे बढ़ती गई। 16 जनवरी, 2003 को फिर एक बार कल्पना ने स्पेस शटल कोलम्बिया से अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान भरी जो 16 दिन का मिशन था।

पहले मिल चुके थे यान क्रेश होने के संकेत

अपने दूसरे अंतरिक्ष मिशन को पूरा कर कल्पना चावला अपने 6 साथियों की टीम के साथ जब लौट रही थी तब उनका यान पृथ्वी की कक्षा के एकदम नजदीक क्षतिग्रस्त हो गया और देखते ही देखते कल्पना सहित उनके 6 साथी काल का ग्रास बन गए। आगे नासा के प्रोग्राम मैनेजर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि यान के सुरक्षित धरती पर लौटने के संकेत पहले ही मिल चुके थे, लेकिन इसके बारे में किसी को भनक नहीं लगने दी गई।

कल्पना चावला: भारतीय मूल की पहली अंतरिक्ष यात्री जिसने आसमां को बनाया सपनों की दुनिया

खुलासा करने के बाद कल्पना की मौत कई दिन गुत्थी बनी रही जो आजतक अनसुलझी ही है। आगे चलकर अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कल्पना के सम्मान में एक छोटे सौर पिंड का नाम कल्पना चावला रखा।

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