ज़ाकिर हुसैन: वो राष्ट्रपति जिसके जीतने का इंतजार कर रहा था पूरा दिल्ली

Views : 3534  |  3 minutes read
Zakir-Husain

भारत का पूर्व राष्ट्रपति जो देश की आजादी के समय अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ महात्मा गांधी के साथ रहने लगा था। हम बात कर रहे हैं भारत के तीसरे राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की जो देश में आधुनिक शिक्षा के बड़े समर्थकों में से एक माने जाते थे। उन्हें महज 29 साल की उम्र में जामिया मिलिया इस्लामिया का वाईस चांसलर बनने का मौका मिला था। 8 फरवरी को ज़ाकिर हुसैन की बर्थ एनिवर्सरी है। ऐसे में जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ अनसुनी और रोचक बातें..

8 साल की उम्र में उठ गया पिता का साया

ज़ाकिर हुसैन का जन्म 18 फरवरी, 1857 को हैदराबाद में हुआ। महज 8 साल की छोटी उम्र में ही जाकिर के पिता का देहांत हो गय़ा। पढ़ाई करने के दौरान गांधी से खासा प्रभावित हुए कि पढ़ाई छोड़ आज़ादी की लड़ाई में कूद गए। देश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने का काम गांधीजी ने जाकिर हुसैन को दिया, जिसके बाद वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति बने। शिक्षा के अलावा 1992 से 1997 तक उन्होंने राजयसभा सदस्य के तौर पर भी काम किया। जाकिर हुसैन को पद्म विभूषण और सबसे बड़े अवार्ड भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है।

जामा मस्जिद से हुआ जाकिर की जीत का ऐलान

देश के साथ-साथ दिल्ली में खास तौर पर जाकिर हुसैन को पसंद किया जाता था। जब जाकिर राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे तो नतीजे वाले दिन लोग राष्ट्रपति भवन के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे। आखिरकार 6 मई 1967 को एआईआर पर जाकिर हुसैन की जीत का ऐलान किया गया और 13 मई 1967 को उन्होंने तीसरे राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला। उनकी जीत का ऐलान दिल्ली की जामा मस्जिद से किया गया।

कल्पना दत्त: सूर्यसेन के क्रांतिकारी संगठन से जुड़कर देश की आजादी के लिए लड़ने वाली ​’वीर महिला’

 

COMMENT