बिमल रॉय: हिंदी सिनेमा को अपने निर्देशन में दी कई सफल फिल्में

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bimal roy

हिंदी सिनेमा के जाने माने फिल्म डायरेक्टर बिमल रॉय की 8 जनवरी को 54वीं डेथ एनिवर्सरी हैं। उन्होंने यथार्थवादी और समाजपरक फिल्में दो बीघा ज़मीन,परिणीता, मधुमती, बंदिनी, सुजाता और परख जैसी शानदार फिल्‍मों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर में अनेक अवॉर्ड ​जीते। जिनमें 11 फिल्मफेयर, दो नेशनल फिल्म और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कान्स फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड शामिल हैं। उनके निर्देशन में बनी फिल्म ‘मधुमती’ को वर्ष 1958 में 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे, यह रिकॉर्ड 37 साल तक कायम रहा।

फिल्मी कॅरियर

बिमल रॉय का जन्‍म 12 जुलाई, 1909 को ढाका के सुत्रपुर गांव में हुआ था। उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत कोलकाता से की। वहां पर उन्होंने ‘न्यू थियेटर प्राइवेट लिमिटेड’ में बतौर कैमरा असिस्टेंट के रूप में काम किया। वर्ष 1935 में आई हिट फिल्म ‘देवदास’ में उन्होंने पब्लिसिटी फोटोग्राफर के रूप में काम किया।

Do Bigha Zamin

द्वितीय विश्व युद्ध और देश की आजादी के बाद बंगाली सिनेमा में गिरावट आई। उन्होंने न्यू थियेटर के साथ अंतिम प्रमुख फिल्म वर्ष 1948 में अंजानगढ़ में काम किया। वह अपनी टीम के साथ वर्ष 1950 में मुंबई आ गए। जिसमें हृषिकेश मुखर्जी (संपादक), नबेंदु घोष (पटकथा लेखक), असित सेन (सहायक निर्देशक), कमल बोस (छायाकार) और बाद में, सलिल चौधरी (संगीत निर्देशक) प्रमुख थे। वर्ष 1952 तक उन्होंने अपने कॅरियर के दूसरे चरण की शुरूआत की और मां फिल्म बनाई।

उन्होंने डायरेक्शन के क्षेत्र में शुरुआत वर्ष 1953 में फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ से की थी। वर्ष 1959 में बिमल ने पहले मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के जूरी में सदस्य थे। रॉय ने अपने निर्देशन में सामाजिक मुद्दों को लेकर फिल्में बनाई। उस जमाने में बॉलीवुड इतना कमर्शियल नहीं था, जितना आज के दौर में है। उनकी फिल्में अपने दर्शकों को कुछ सीख दे जाती थीं और कई सवाल खड़े करती थी।

उनके दौर में विभिन्न सामाजिक मुद्दों जैसे जमींदारी, गरीबी, निम्‍न वर्गों को लेकर छुआछूत, औरतों को घर से न निकलने देने जैसे कई मुद्दों पर फिल्में बनती थी। उन्‍होंने अपनी फिल्‍मों के माध्‍यम से फिल्‍म जगत की नींव को तो मजबूत किया ही, समाज को भी जागरुक करने का काम किया।

अवॉर्ड

बिमल राय ने सिनेमा जगत को उल्लेखनीय योगदान दिया जिसके लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अवॉर्ड मिले। उन्हें 11 फिल्‍मफेयर अवॉर्ड, 2 नेशनल फिल्म पुरस्‍कार और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कान्‍स फिल्‍म फेस्टिवल में अवॉर्ड प्रदान किए गए। वर्ष 1958 में उनकी फिल्‍म ‘मधुमति’ ने 9 फिल्‍मफेयर अवॉर्ड जीते थे।

निधन

बिमल रॉय का 8 जनवरी, 1996 को निधन हो गया। उनकी मृत्यु से सिनेमा जगत को बड़ी हानि हुई।

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