जयंती: फांसी दिए जाने से पहले भगत सिंह का आखिरी खत है रूला देने वाला

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भारत को आज़ादी दिलाने के लिए मात्र 23 वर्ष की उम्र में प्राणों की आहुति देने वाले शहीद सरदार भगत सिंह का नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज़ हैं। भगत सिंह का जन्म आज ही के दिन यानी 28 सिंतबर, 1907 को ब्रिटिश भारत के समय बांगा (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। इतनी कम उम्र में वे देश के लिए वो कर गए जो आज देश के लाखों युवाओं की प्रेरणा है। देशभक्ति के जज्बे से खुद को लबालब करने के लिए भगत सिंह नाम ही काफी है। सिंह ने अंग्रेजों की असेंबली में बम फेंककर तहलका मचा दिया था, जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। ऐसे में सरदार भगत सिंह की जयंती के अवसर पर जानते हैं उनके बारे में ख़ास बातें…

फांसी के वक्त लाहौर जेल की हर आंख रोईं

भगत सिंह के जेल के दिनों के कई किस्से काफी प्रचलित हैं। वो जेल में दुनिया के महान क्रांतिकारियों की किताबें पढ़ा करते थे तो वहीं से देश के नाम उन्होंने कई खत लिखे थे। कहा जाता है कि जब भगत सिंह को फांसी दी जाने वाली थी तो लाहौर जेल की हर आंख रो रही थी। जेल के अधिकारियों के हाथ भारत मां के इस लाल को फांसी देने से पहले कांप रहे थे। आखिरकार फांसी का दिन आया और अंग्रेजों ने अपने नियम अनुसार, सरदार भगत सिंह और उनके अन्य साथियों को पहले नहलाया गया और इसके बाद उन्हें पहनने के लिए नए कपड़े दिए गए।

भगत सिंह और उनके अन्य साथी जब जल्लाद के सामने आए तो उसने तीनों से आखिरी ख़्वाहिश पूछी, जिस पर तीनों ने कहा कि हम आपस में एक दूसरे से गले मिलना चाहते हैं। भगत के कई खत आज भी पढ़े जाते हैं, लेकिन उनको फांसी दिए जाने से पहले जो आखिरी ख़त उन्होंने लिखा उसका जिक्र हर जगह मिलता है।

भगत सिंह ने फांसी के तख्त पर चढ़ने से पहले लिखा–

“साथियों स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता हूं, लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैद होकर ना रहूं। मेरा नाम हिन्दुस्तान की क्रांति का प्रतीक बन चुका है, क्रांतिकारी दलों के आदर्शों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है, इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा नहीं हो सकता था। मेरे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने की सूरत में देश की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह की उम्मीद करेंगी। इससे आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा. आजकल मुझे खुद पर बहुत गर्व है। अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है. कामना है कि यह और नजदीक हो जाए।”

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