पुण्यतिथि विशेष: भारत के 96 प्रतिशत दर्शकों को ‘महाभारत’ दिखाने वाले महान निर्देशक थे बी.आर चोपड़ा

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बॉलीवुड में एक दौर वो था जब फिल्में बेहतरीन निर्देशन और दमदार अभिनय के कारण सफलता के झंडें गाढ़ती थी। ब्लैक एंड व्हाइट के उस दौर में कई ऐसे महान निर्माता निर्देशक हुए हैं जिनके बेहतरीन निर्देशन में बनी फिल्में हिंदी सिनेमा की मील का पत्थर साबित हुई। आज हम बात कर रहे है एक ऐसे ही शख्स की जिन्होंने समाज को पारिवारिक और साफ-सुथरी कहानियों वाली फिल्में परोसी। 5 नवंबर को बलदेव राज चोपड़ा की पुण्यतिथि है। जिन्हें बी.आर चोपड़ा के नाम से जाना जाता है। इस खास मौके पर आइए एक नजर डाले उनकी जिंदगी पर।

बी.आर चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल, 1914 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। बी.आर चोपड़ा ने लाहौर के मशहूर सरकारी विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी।

बतौर फिल्मी पत्रकार के रुप में की कॅरियर की शुरुआत

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1944 में बी.आर चोपड़ा सिने हेराल्ड नाम की फिल्मी मैग्जीन में बतौर फिल्मी पत्रकार के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की। यह मैग्जीन मासिक थी और लाहौर से प्रकाशित होती थी। इस मैग्जीन में बी.आर चोपड़ा ने करीब 3 साल तक कार्य किया। साल 1947 में बी.आर चोपड़ा ने आई.एस. जौहर के साथ मिलकर चांदनी चौक का निर्माण किया। लेकिन किन्ही कारणों से इस फिल्म को बीच में ही बंद करना पड़ गया।

साल 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद बी.आर चोपड़ा मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद उन्होंने साल 1948 में फिल्म करवट का निर्माण किया जो बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई।

निर्देशन की दुनिया में रखा कदम

साल 1951 में बी.आर चोपड़ा ने फिल्म अफसाना का निर्देशन किया। फिल्म में अभिनेता अशोक कुमार डबल रोल में थे। फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा। टिकट खिड़की पर फिल्म सफल साबित हुई। अपनी पहली ही फिल्म से बी.आर चोपड़ा बॉलीवुड में पहचान बनाने में कामयाब रहे। इस फिल्म की सफलता के बाद साल 1954 में फिल्म चांदनी चौक का निर्माण किया। जिसमें अभिनेत्री मीना कुमारी बतौर अभिनेत्री थी। साल 1955 बी.आर चोपड़ा के लिए महत्वपूर्ण साल साबित हुआ। इस साल उन्होंने अपने प्रोडक्शन कंपनी का निर्माण किया। जिसके बाद साल में फिल्म नया दौर का निर्माण हुआ जो सुपरहिट साबित हुई।

बेहतरीन फिल्में

इनकी बेहतरीन फिल्मों में ‘साधना’ (1958), ‘क़ानून’ (1960), ‘गुमराह’ (1963) और ‘हमराज़’ (1967) कानून (1960), नया दौर(1957) जैसी बेहतरीन फिल्मों दी।

टेलिविजन की दुनिया में रहा महत्वपूर्ण योगदान

फिल्मी दुनिया के अलावा बी.आर चोपड़ा ने छोटे पर्दे पर भी काम किया। बी.आर चोपड़ा ने ऐतिहासिक टी.वी सीरियल महाभारत और बहादुर शाह जफर का निर्माण किया।

फिल्मों में बेहतरीन योगदान के लिए मिले ये पुरस्कार
पद्म भूषण -2001
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार – वर्ष 1960 (कानून)
राष्ट्रपति रजत पदक – 1961 ( धर्मपुत्र )
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार – 1998
फिल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ निदेशक – 1962
लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए कलाकार पुरस्कार- 1998
दादासाहेब फाल्के अकादमी द्वारा फाल्के रत्न अवॉर्ड – 2008

94 साल की उम्र में 5 नवंबर, 2008 को बी.आर. चोपड़ा का मुंबई में निधन हो गया।

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