विधानसभा चुनावों में मुद्दों पर बात कम, मीडिया भी कर रहा फौरी कवरेज

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विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण के हो भी चुके हैं राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी चुनाव होने के हैं। पार्टियों में टिकटों को लेकर मारा मारी चल रही है। आरोप प्रत्यारोप के साथ हर सभा को संबोधित किया जा रहा है।

तीनों ही राज्य में बीजेपी की सरकार रही है। मध्य प्रदेश में जहां काफी सालों से शिवराज ही सेवा दे रहे हैं, वहीं राजस्थान में हर बार सरकार बदलती है, इतिहास बदलता है। इन सबके बीच वो चीज जो ध्यान में रखने की जरूरत है वो है मुद्दे।

राजनीतिक पार्टियां जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही टिकटों का बंटवारा करती हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। मीडिया इसमें एक अजीब भूमिका निभाता है। मीडिया वो दिखा नहीं पाता जो जनता के हित में है। वो भी कहीं ना कहीं किसी तीसरी पार्टी की भांति अपना काम करता है।

जैसे खुद भी चुनावों में हो। आपको सीटों के समीकरणों को दिखाया जाता है। कौनसी सीट पर कौन खड़ा होगा? वो किस जाति का है? किस क्षेत्र में खड़ा होगा? इससे पार्टी को क्या फायदा होगा? ये कुछ सवाल हैं जिनका मीडिया आपको जवाब दे भी देती है। लेकिन जनता के लिए अपनी भूमिका वो भूलता जा रहा है।

जनता को जागरूक करना मीडिया का पहला काम है। उसमें कहीं ना कहीं कमी नजर आती है। मीडिया जब विफल होता है तब राजनीतिक पार्टियां जीत दर्ज कर लेती हैं। राज्य में क्या कमी है, क्या कमी दूर नहीं की गई, इसके बारे में ना तो विपक्ष ठीक से बता पाता है ना ही मीडिया।

फायदे नुकसान की राजनीति में नुकसान जनता का होना है ये तय है। हर बार चुनावों से पहले सरकार और विपक्ष घोषणा पत्र जारी करता है। लेकिन मीडिया सरकार से पूछने की जहमत नहीं करती कि पिछली बार सत्ता में आने पर कौनसे वादे पूरे हुए और कौनसे नहीं। इससे और कुछ नहीं राजनीतिक पार्टियों का काम आसान हो जाता है। जनता कहीं ना कहीं जातिगत समीकरणों का शिकार हो जाती है। मुद्दे आस—पास होते हुए भी दूर हैं।

राजस्थान में ये खास तौर पर देखा जा रहा है। राजपूत वोट बैंक और जाट वोट बैंक को तवज्जो दी जाती है। इनके आधार पर ही उम्मीदवार खड़े किए जाते हैं। जनता वोट देती भी है। इस ध्रुवीकरण का शिकार होती भी है।

मीडिया जनता को जागरुक नहीं करता वो जनता को बताता है कि इस सीट पर इस जाति का नेता खड़ा किया गया है और इससे इस पार्टी को फायदा होगा। राजनीतिक पार्टियां हर संभव प्रयास यही करेंगी कि समीकरणों के आधार पर चुनाव लड़ा जाए। यहां मीडिया को अपना काम अच्छे से करने की जरूरत है। वहीं जनता को जागरूक होने की जरूरत है।

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